भोग लगाने की आरती सभी मिल सगत्यां नवलख — करणी माता आरती Lyrics, अर्थ व भावार्थ 2026

भोग लगाने की आरती सभी मिल सगत्यां नवलख — करणी माता

भोग लगाने की आरती सभी मिल सगत्यां नवलख — करणी माता आरती Lyrics, अर्थ व भावार्थ 2026

करणी माता की भोग आरती 'सभी मिल सगत्यां नवलख' का सम्पूर्ण lyrics, हिंदी अनुवाद, दोहा-वार भावार्थ, डोकरी-दाढाली का रहस्य, छतीसों भोजन, खटरस और राजस्थानी भक्ति परंपरा।

✍️ 📅 प्रकाशित: 🔄 अपडेटेड: ⏱️ पढ़ने का समय: ~10 मिनट

1. आरती परिचय — डोकरी, दाढाली और नवलख सगत्यां

भोग लगाने की आरती — करणी माता (डोकरी / दाढाली)

यह आरती माँ करणी (जिन्हें 'डोकरी' और 'दाढाली' भी कहा जाता है) के भोग अर्पण का एक बहुत ही सुंदर और भक्तिमय चित्रण है। इसमें माँ को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है और उनकी महिमा का गुणगान किया जा रहा है।

💡 जानें: करणी माता का सम्पूर्ण इतिहास — जन्म संवत् 1453, चमत्कार, देशनोक मंदिर और अवतार कथा।

माँ करणी को हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है और वे चारण समाज की कुलदेवी हैं। उन्होंने 151 वर्ष तक धरती पर तपस्या की और राजस्थान के कई राज्यों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🔑 आरती के मुख्य शब्दों का रहस्य

शब्द अर्थ भाव
डोकरी बुजुर्ग सम्मानजनक माँ (दादी) ममता और वात्सल्य का संबोधन
दाढाली दाढ़ी वाली माँ तपस्वी और ओजस्वी वृद्ध स्वरूप
नवलख नौ लाख नौ लाख दिव्य शक्तियाँ
सगत्यां साथियों / शक्तियों के साथ दिव्य परिवार का आमंत्रण
छतीसों 36 प्रकार के संपूर्ण और राजसी भोजन
खटरस छहों रस युक्त आयुर्वेदिक संतुलित आहार

2. मुखड़ा — सभी मिल सगत्यां नवलख

सभी मिल सगत्यां नवलख संग डोकरी जीमो दाढाली
आसो दाख दुबारो बिस्की, पीवो मद प्याली॥
अनुवाद: हे दाढाली (दाढ़ी वाली माँ—जो माँ करणी का एक स्वरूप है)! आप अपनी नौ लाख शक्तियों (सगत्यां) के साथ पधारें और इस भोग को ग्रहण करें। आप दाख (अंगूर) से बनी मदिरा और उत्तम पेय के प्यालों का पान करें।
भावार्थ: भक्त माँ को उनके पूरे परिवार और दिव्य शक्तियों के साथ आमंत्रित कर रहा है कि वे पधारें और प्रसन्न होकर भोग स्वीकार करें। 'दुबारो' और 'बिस्की' राजस्थानी भाषा में उत्तम शराब/पेय के प्रकार हैं। यह माँ के राजसी स्वागत को दर्शाता है।

📚 गहरा अर्थ: 'डोकरी' राजस्थान में दादी या बुजुर्ग महिला को सम्मान से कहते हैं। माँ करणी 151 वर्ष तक जीवित रही थीं, इसलिए उनके वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। यह संबोधन भक्त और भगवान के बीच 'ममता' के रिश्ते को दिखाता है। 'दाढाली' का अर्थ है 'दाढ़ी वाली माँ' — माँ करणी के चेहरे पर वृद्धावस्था के कारण हल्की दाढ़ी-मूंछ के बाल आ गए थे। यह स्वरूप उनके तपस्वी और ओजस्वी होने का प्रतीक है।

3. दोहा 1 — सुवरणा थाल छतीसों भोजन

सुवरणा थाल छतीसों भोजन बैठों बिरदाली॥ १॥
अनुवाद: हे यशस्विनी माता (बिरदाली)! आपके सामने स्वर्ण (सोने) की थाली सजी है, जिसमें छतीस प्रकार के (अनेकों) व्यंजन रखे हैं। आप आसन ग्रहण करें और भोजन का आनंद लें।
भावार्थ: यहाँ भक्त की श्रद्धा स्वर्ण थाल के रूप में प्रकट हो रही है, जो माँ के प्रति उसके सर्वोच्च आदर को दर्शाती है। छतीसों भोजन प्राचीन भारतीय परंपरा में 36 प्रकार के मुख्य पकवान माने गए हैं। भक्त यह सुनिश्चित कर रहा है कि माँ की थाली संपूर्ण और राजसी हो।

4. दोहा 2 — साट पुलाव सोयतो लीजे

साट पुलाव सोयतो लीजे माता मत वाली।।
दाब कलेजी और भुजंगो जीमो माँ काली॥ २॥
अनुवाद: हे आनंद में रहने वाली माँ! आप साट (एक प्रकार का पकवान), पुलाव और सोयता ग्रहण करें। हे माँ काली स्वरूप करणी! आप कलेजी और भुजंग (प्रतीकात्मक रूप से तामसिक भोग का वर्णन) का भोग स्वीकार करें।
भावार्थ: सोयता बाजरे और मक्के से बनने वाला एक विशेष राजस्थानी व्यंजन है जो राजस्थान की मिट्टी की महक को माँ के भोग से जोड़ता है। यहाँ माँ के शक्ति स्वरूप (काली रूप) को समर्पित है। शक्ति परंपरा में माँ को संहारक और रक्षक दोनों माना जाता है, इसलिए यहाँ उन्हें वीर भोग अर्पण किया जा रहा है। 'कलेजी' और 'भुजंग' का उल्लेख माँ के उस उग्र स्वरूप के लिए है जो शत्रुओं और बुराइयों का विनाश करता है। शक्ति पूजा में 'तामसिक भोग' का सांकेतिक अर्थ होता है — अपने भीतर के काम, क्रोध और लोभ रूपी पशु की बलि देना और उसे माँ को अर्पित कर देना।

🕉️ तांत्रिक अर्थ: माँ करणी को हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है, जो महाकाली का रूप हैं। यहाँ का भोग उनके उग्र स्वरूप को संतुष्ट करने के लिए है।

5. दोहा 3 — घेवर पुड़ी पकवान मिठाई

घेवर पुड़ी पकवान मिठाई खटरस इक थाली।
आप आरोगो मात ईश्वरी चण्डी चिरताली॥ ३॥
अनुवाद: थाली में घेवर, पूरी और कई तरह के पकवान व मिठाइयाँ हैं, जिनमें छहों रस (मीठा, खट्टा, खारा, तीखा आदि) मौजूद हैं। हे चंडी रूपी ईश्वरी! आप इस भोजन को आरोगें (ग्रहण करें)।
भावार्थ: घेवर राजस्थान का प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई है। खटरस का अर्थ है छहों रस युक्त — आयुर्वेद के अनुसार भोजन में छह रस होने चाहिए (मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त और कषाय)। भक्त चाहता है कि माँ को हर प्रकार के स्वाद और प्रेम से बना भोजन प्राप्त हो। चिरताली का अर्थ है चिरस्थायी / सनातन। माँ चंडी रूप में सदा से हैं और सदा रहेंगी।

6. दोहा 4 — रिद्धि-सिद्धि चंवर करे

रिद्धि-सिद्धि चंवर करे निज कर सू आनन्द उजियाली।
कंचन कलश गंगाजल भरियो, पीवो प्रतिपाली॥ ४॥
अनुवाद: स्वयं रिद्धि और सिद्धि अपने हाथों से आप पर चंवर डुला रही हैं, जिससे चारों ओर आनंद का प्रकाश फैल रहा है। सोने के कलश में गंगाजल भरा है, हे भक्तों का प्रतिपालन करने वाली माँ! आप इस जल का पान करें।
भावार्थ: रिद्धि-सिद्धि गणेश जी की पत्नियाँ और संपन्नता की देवियाँ हैं। यहाँ वे माँ करणी की परिचारिका (सेवा करने वाली) के रूप में दिखाई गई हैं। यह माँ करणी के सर्वोच्च स्थान को दर्शाता है कि साक्षात लक्ष्मी और संपन्नता उनके चरणों में सेवा करती हैं। कंचन कलश (सोने का लोटा) में गंगाजल — यह भोजन के बाद शुद्ध जल का आचमन कराना अतिथि सत्कार की पराकाष्ठा है। भक्त माँ को सर्वोत्तम सामग्री से सेवा कर रहा है।

7. दोहा 5 — ढोल नगारा नोवत झालर

ढोल नगारा नोवत झालर बाज रही टाली।
मेहाई जब मात अरोगे, बीस भुजा वाली॥ ५॥
अनुवाद: ढोल, नगाड़े, नौबत और झालरें बज रही हैं। जब बीस भुजाओं वाली माँ मेहाई (करणी जी का नाम) भोजन करती हैं।
भावार्थ: यह उत्सव का माहौल है। माँ के स्वागत में दिव्य वाद्य यंत्र बज रहे हैं। नोवत (नौबत) राजसी दरबारों में बजने वाला वाद्य है। मेहाई माँ करणी का एक प्रसिद्ध नाम है। बीस भुजा वाली माँ करणी के उस विशाल शक्ति स्वरूप को दर्शाता है जिसमें उनके पास बीस भुजाएँ हैं — यह उनके सर्वशक्तिमान होने का प्रतीक है। भक्त कल्पना कर रहा है कि माँ साक्षात प्रकट होकर भोग लगा रही हैं।

8. दोहा 6 (उपसंहार) — अम्बादान चण्डी तेरो चेरो

अम्बादान चण्डी तेरो चेरो माँ धावल वाली
काट कलेश दुःखहर रारिद कर सम्पत्ति साली॥ ६॥
अनुवाद: कवि (अम्बादान जी) कहते हैं कि हे धवल (सफेद) वस्त्र धारण करने वाली माँ! मैं आपका सेवक (चेरो/चेला) हूँ। आप मेरे क्लेशों को काटें, दुखों का हरण करें, दरिद्रता (रारिद) मिटाएं और मुझे सुख-संपत्ति से संपन्न करें।
भावार्थ: अम्बादान इस आरती के रचयिता कवि हैं। उन्होंने अपने को 'चेरो' यानी चेला (सेवक) कहा है। धावल वाली — माँ करणी को सफेद वस्त्र बहुत प्रिय थे, इसलिए उन्हें 'धवल वस्त्रा' कहा जाता है। सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है। अंतिम पंक्तियों में भक्त माँ से अपनी सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना करता है। रारिद का अर्थ है दरिद्रता — यहाँ दरिद्रता केवल धन की नहीं, बल्कि विचारों की भी है। भक्त चाहता है कि माँ उसे सुख-संपत्ति से संपन्न करें।

9. संक्षिप्त भावार्थ और निष्कर्ष

📌 संक्षिप्त भावार्थ:

यह आरती माँ करणी के प्रति पूर्ण समर्पण और राजसी सेवा का भाव है। इसमें उन्हें केवल एक देवी नहीं, बल्कि एक 'डोकरी' (बुजुर्ग ममतामयी माँ) और 'चंडी' (शक्तिशाली रक्षक) दोनों रूपों में देख कर लाड लड़ाया गया है।

माँ करणी की यह 'भोग की आरती' केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह राजस्थानी भक्ति परंपरा और शक्ति पूजा के उस गहरे संबंध को दर्शाती है जहाँ भक्त अपनी आराध्या को घर के बड़े बुजुर्ग (डोकरी) की तरह लाड भी लड़ाता है और साक्षात जगदम्बा मानकर उनकी स्तुति भी करता है।

🎯 निष्कर्ष — भावार्थ का सार

यह आरती एक 'राजभोग' की झांकी है। इसमें भक्त पहले माँ को उनकी शक्ति के साथ आमंत्रित करता, फिर उन्हें सबसे उत्तम आसन पर बिठाता है, तरह-तरह के राजस्थानी पकवान परोसता है, दिव्य संगीत (ढोल-नगाड़े) बजवाता है और अंत में अपना सब कुछ माँ को सौंपकर अपने दुखों के निवारण की विनती करता है।

🙏 जानें: करणी माता का सम्पूर्ण इतिहास — जन्म संवत् 1453, चमत्कार, देशनोक मंदिर, और अवतार कथा। 

10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — भोग आरती (FAQs)

❓ सभी मिल सगत्यां नवलख आरती किसकी है?

यह आरती माँ करणी (करणी माता) की भोग आरती है। इसमें माँ को 'डोकरी' और 'दाढाली' के नाम से भी संबोधित किया गया है।

❓ डोकरी और दाढाली का क्या अर्थ है?

डोकरी का अर्थ है बुजुर्ग सम्मानजनक माँ (दादी) और दाढाली का अर्थ है दाढ़ी वाली माँ। माँ करणी 151 वर्ष तक जीवित रहीं, इसलिए उनके वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। यह संबोधन भक्त और भगवान के बीच 'ममता' के रिश्ते को दिखाता है।

❓ नवलख सगत्यां का क्या मतलब है?

नवलख का अर्थ है नौ लाख। शक्ति परंपरा में माना जाता है कि माँ करणी के साथ नौ लाख लोवडियाली शक्तियाँ (दिव्य शक्तियों का स्वरूप) हमेशा चलती हैं।

❓ छतीसों भोजन और खटरस का क्या अर्थ है?

छतीसों भोजन का अर्थ है 36 प्रकार के पकवान। खटरस का अर्थ है छहों रस (मीठा, खट्टा, खारा, तीखा, तिक्त, कषाय) युक्त भोजन।

❓ साट और सोयता क्या है?

साट और सोयता राजस्थान के पारंपरिक पकवान हैं। सोयता बाजरे और मक्के से बनने वाला एक विशेष व्यंजन है जो राजस्थानी संस्कृति का प्रतीक है।

❓ अम्बादान कौन हैं?

अम्बादान इस आरती के रचयिता कवि हैं। उन्होंने अपने को माँ करणी का 'चेरो' यानी चेला (सेवक) कहा है।

❓ धावल वाली का क्या अर्थ है?

धावल का अर्थ है सफेद। माँ करणी को सफेद वस्त्र बहुत प्रिय थे, इसलिए उन्हें 'धवल वस्त्रा' कहा जाता है। सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है।

❓ बीस भुजा वाली का क्या मतलब है?

बीस भुजा वाली माँ करणी के उस विशाल शक्ति स्वरूप को दर्शाता है जिसमें उनके पास बीस भुजाएँ हैं। यह उनके सर्वशक्तिमान होने का प्रतीक है।

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🙏 जय माँ करणी! 🙏

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