भोग लगाने की आरती सभी मिल सगत्यां नवलख — करणी माता आरती Lyrics, अर्थ व भावार्थ 2026
करणी माता की भोग आरती 'सभी मिल सगत्यां नवलख' का सम्पूर्ण lyrics, हिंदी अनुवाद, दोहा-वार भावार्थ, डोकरी-दाढाली का रहस्य, छतीसों भोजन, खटरस और राजस्थानी भक्ति परंपरा।
📋 विषय सूची (Table of Contents)
- 👉 1. आरती परिचय — डोकरी, दाढाली और नवलख सगत्यां
- 👉 2. मुखड़ा — सभी मिल सगत्यां नवलख
- 👉 3. दोहा 1 — सुवरणा थाल छतीसों भोजन
- 👉 4. दोहा 2 — साट पुलाव सोयतो लीजे
- 👉 5. दोहा 3 — घेवर पुड़ी पकवान मिठाई
- 👉 6. दोहा 4 — रिद्धि-सिद्धि चंवर करे
- 👉 7. दोहा 5 — ढोल नगारा नोवत झालर
- 👉 8. दोहा 6 — अम्बादान चण्डी तेरो चेरो
- 👉 9. संक्षिप्त भावार्थ और निष्कर्ष
- 👉 10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. आरती परिचय — डोकरी, दाढाली और नवलख सगत्यां
यह आरती माँ करणी (जिन्हें 'डोकरी' और 'दाढाली' भी कहा जाता है) के भोग अर्पण का एक बहुत ही सुंदर और भक्तिमय चित्रण है। इसमें माँ को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है और उनकी महिमा का गुणगान किया जा रहा है।
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माँ करणी को हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है और वे चारण समाज की कुलदेवी हैं। उन्होंने 151 वर्ष तक धरती पर तपस्या की और राजस्थान के कई राज्यों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🔑 आरती के मुख्य शब्दों का रहस्य
| शब्द | अर्थ | भाव |
|---|---|---|
| डोकरी | बुजुर्ग सम्मानजनक माँ (दादी) | ममता और वात्सल्य का संबोधन |
| दाढाली | दाढ़ी वाली माँ | तपस्वी और ओजस्वी वृद्ध स्वरूप |
| नवलख | नौ लाख | नौ लाख दिव्य शक्तियाँ |
| सगत्यां | साथियों / शक्तियों के साथ | दिव्य परिवार का आमंत्रण |
| छतीसों | 36 प्रकार के | संपूर्ण और राजसी भोजन |
| खटरस | छहों रस युक्त | आयुर्वेदिक संतुलित आहार |
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2. मुखड़ा — सभी मिल सगत्यां नवलख
आसो दाख दुबारो बिस्की, पीवो मद प्याली॥
📚 गहरा अर्थ: 'डोकरी' राजस्थान में दादी या बुजुर्ग महिला को सम्मान से कहते हैं। माँ करणी 151 वर्ष तक जीवित रही थीं, इसलिए उनके वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। यह संबोधन भक्त और भगवान के बीच 'ममता' के रिश्ते को दिखाता है। 'दाढाली' का अर्थ है 'दाढ़ी वाली माँ' — माँ करणी के चेहरे पर वृद्धावस्था के कारण हल्की दाढ़ी-मूंछ के बाल आ गए थे। यह स्वरूप उनके तपस्वी और ओजस्वी होने का प्रतीक है।
3. दोहा 1 — सुवरणा थाल छतीसों भोजन
4. दोहा 2 — साट पुलाव सोयतो लीजे
दाब कलेजी और भुजंगो जीमो माँ काली॥ २॥
🕉️ तांत्रिक अर्थ: माँ करणी को हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है, जो महाकाली का रूप हैं। यहाँ का भोग उनके उग्र स्वरूप को संतुष्ट करने के लिए है।
5. दोहा 3 — घेवर पुड़ी पकवान मिठाई
आप आरोगो मात ईश्वरी चण्डी चिरताली॥ ३॥
6. दोहा 4 — रिद्धि-सिद्धि चंवर करे
कंचन कलश गंगाजल भरियो, पीवो प्रतिपाली॥ ४॥
7. दोहा 5 — ढोल नगारा नोवत झालर
मेहाई जब मात अरोगे, बीस भुजा वाली॥ ५॥
8. दोहा 6 (उपसंहार) — अम्बादान चण्डी तेरो चेरो
काट कलेश दुःखहर रारिद कर सम्पत्ति साली॥ ६॥
9. संक्षिप्त भावार्थ और निष्कर्ष
📌 संक्षिप्त भावार्थ:
यह आरती माँ करणी के प्रति पूर्ण समर्पण और राजसी सेवा का भाव है। इसमें उन्हें केवल एक देवी नहीं, बल्कि एक 'डोकरी' (बुजुर्ग ममतामयी माँ) और 'चंडी' (शक्तिशाली रक्षक) दोनों रूपों में देख कर लाड लड़ाया गया है।
माँ करणी की यह 'भोग की आरती' केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह राजस्थानी भक्ति परंपरा और शक्ति पूजा के उस गहरे संबंध को दर्शाती है जहाँ भक्त अपनी आराध्या को घर के बड़े बुजुर्ग (डोकरी) की तरह लाड भी लड़ाता है और साक्षात जगदम्बा मानकर उनकी स्तुति भी करता है।
🎯 निष्कर्ष — भावार्थ का सार
यह आरती एक 'राजभोग' की झांकी है। इसमें भक्त पहले माँ को उनकी शक्ति के साथ आमंत्रित करता, फिर उन्हें सबसे उत्तम आसन पर बिठाता है, तरह-तरह के राजस्थानी पकवान परोसता है, दिव्य संगीत (ढोल-नगाड़े) बजवाता है और अंत में अपना सब कुछ माँ को सौंपकर अपने दुखों के निवारण की विनती करता है।
🙏 जानें: करणी माता का सम्पूर्ण इतिहास — जन्म संवत् 1453, चमत्कार, देशनोक मंदिर, और अवतार कथा।
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — भोग आरती (FAQs)
❓ सभी मिल सगत्यां नवलख आरती किसकी है?
यह आरती माँ करणी (करणी माता) की भोग आरती है। इसमें माँ को 'डोकरी' और 'दाढाली' के नाम से भी संबोधित किया गया है।
❓ डोकरी और दाढाली का क्या अर्थ है?
डोकरी का अर्थ है बुजुर्ग सम्मानजनक माँ (दादी) और दाढाली का अर्थ है दाढ़ी वाली माँ। माँ करणी 151 वर्ष तक जीवित रहीं, इसलिए उनके वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। यह संबोधन भक्त और भगवान के बीच 'ममता' के रिश्ते को दिखाता है।
❓ नवलख सगत्यां का क्या मतलब है?
नवलख का अर्थ है नौ लाख। शक्ति परंपरा में माना जाता है कि माँ करणी के साथ नौ लाख लोवडियाली शक्तियाँ (दिव्य शक्तियों का स्वरूप) हमेशा चलती हैं।
❓ छतीसों भोजन और खटरस का क्या अर्थ है?
छतीसों भोजन का अर्थ है 36 प्रकार के पकवान। खटरस का अर्थ है छहों रस (मीठा, खट्टा, खारा, तीखा, तिक्त, कषाय) युक्त भोजन।
❓ साट और सोयता क्या है?
साट और सोयता राजस्थान के पारंपरिक पकवान हैं। सोयता बाजरे और मक्के से बनने वाला एक विशेष व्यंजन है जो राजस्थानी संस्कृति का प्रतीक है।
❓ अम्बादान कौन हैं?
अम्बादान इस आरती के रचयिता कवि हैं। उन्होंने अपने को माँ करणी का 'चेरो' यानी चेला (सेवक) कहा है।
❓ धावल वाली का क्या अर्थ है?
धावल का अर्थ है सफेद। माँ करणी को सफेद वस्त्र बहुत प्रिय थे, इसलिए उन्हें 'धवल वस्त्रा' कहा जाता है। सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है।
❓ बीस भुजा वाली का क्या मतलब है?
बीस भुजा वाली माँ करणी के उस विशाल शक्ति स्वरूप को दर्शाता है जिसमें उनके पास बीस भुजाएँ हैं। यह उनके सर्वशक्तिमान होने का प्रतीक है।
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1 टिप्पणियाँ
Jai karni mata
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