इन्द्रबाईसा (इन्द्र कुंवर बाई) का इतिहास, चरित्र और चमत्कार — खुड़द, नागौर
श्री इन्द्रबाईसा (इन्द्र कुंवर बाई) का सम्पूर्ण चरित्र, जन्म संवत् 1964, चमत्कार, खुड़द मंदिर इतिहास। करणी माता और आवड़ माता के अवतार। नागौर, राजस्थान।
📋 विषय सूची (Table of Contents)
- 👉 1. इन्द्रबाईसा कौन हैं? — परिचय व जन्म
- 👉 2. संक्षिप्त जानकारी (Quick Facts)
- 👉 3. जन्म और कुल परिचय
- 👉 4. दिव्य स्वरूप और मर्दाना वेश
- 👉 5. बाल्यकाल और करणी जी का स्थान
- 👉 6. प्रमुख चमत्कार और कथाएँ
- 👉 7. महाराजा गंगासिंह और बीकानेर यात्रा
- 👉 8. छोटी बाई भणभेंरू और 'इन्द्ररतन प्रेमसागर'
- 👉 9. महाप्रयाण (संवत् 2012)
- 👉 10. खुड़द मंदिर और वर्तमान महत्व
- 👉 11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. इन्द्रबाईसा कौन हैं? — परिचय
श्री इन्द्रबाईसा (इन्द्र कुंवर बाई) आवड़ माता और करणी माता के स्वरूप में अवतरित आदि शक्ति हैं जिनका जन्म नागौर जिले के खुड़द गाँव में विक्रम संवत् 1964 में हुआ। चारण समाज की यह कुलदेवी अपने चमत्कारों और तपस्या से आज भी लाखों भक्तों की आराध्य हैं। इन्द्रबाईसा का खुड़द मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। इन्द्रबाईसा ने अपने 48 वर्षीय जीवनकाल में अनेक अलौकिक चमत्कार किए जिनकी चर्चा आज भी राजस्थान के कोने-कोने में सुनी जाती है।
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खुड़द ग्राम फुलेरा से मेड़ता रोड जाने वाली रेलवे लाईन पर स्थित बेसरोली स्टेशन से लगभग दो मील पश्चिमोत्तर में है। श्री इन्द्र बाईसा का जन्म स्थान होने से इस गाँव और यहाँ की भूमि को गौरव है। यहाँ पर रतनू शाखा के चारण बसते हैं।
आवड़ माता को चारण समाज में हिंगळाज माता के पूर्ण अवतार के रूप में विख्यात हैं। इन्द्रबाईसा को आवड़ माता और करणी माता दोनों का ही अवतार माना जाता है, जिन्होंने वर्तमान युग में चारण समाज की रक्षा और कल्याण के लिए अवतार लिया।
2. संक्षिप्त जानकारी — इन्द्रबाईसा (Quick Facts)
| 📌 इन्द्रबाईसा (इन्द्र कुंवर बाई) — मुख्य तथ्य | |
|---|---|
| जन्म | वि.सं. 1964, खुड़द, नागौर, राजस्थान |
| माता-पिता | श्री सागरदान जी रतनू व श्रीमती धापूबाई जागावत |
| अवतार स्वरूप | आवड़ माता / करणी माता |
| समाज | चारण समाज (रतनू शाखा) |
| मुख्य कार्य | चमत्कार, समाज कल्याण, रोग निवारण |
| महाप्रयाण | वि.सं. 2012 (48 वर्ष की आयु) |
| प्रमुख मंदिर | खुड़द मंदिर, नागौर |
| प्रसिद्ध ग्रंथ | इन्द्ररतन प्रेमसागर (छोटी बाई भणभेंरू द्वारा) |
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3. जन्म और कुल परिचय
इसी गाँव के श्री शिवदाचजी रतनू के पुत्र श्री सागरदान जी का विवाह चारणवास के जागावत श्री दानजी की सुपुत्री धापूबाई जागावत के साथ हुआ था। श्रीमती धापूबाई की कूख से वि.सं. 1964 के आषाढ़ शुक्ला नवमी शुक्रवार के दिन पूजनीया श्री इन्द्रकुंवर बाई का अवतरण हुआ।
जागावत धापू जननि, उण रो तप अछेह।<
उणरि कुख हि ऊपनी, देवल दूजी देह ॥<
शक चौसठि उगनिस सौ, साढ़ शुक्ल शुभ जानि।<
हुकम लेय हिंगलाज रो, आवढ़ प्रगटि आनि ॥<
दसमी के पहले दिवस, जलम लियो जगमात।<
करणी ज्यूं किरपा करी, प्रबल करी सुखपात ॥
इन्द्र बाईसा के अलावा श्रीमती धापू बाई की कूख से एक पुत्री श्रीमती सरदार कुंवरी तथा चार पुत्र — सर्वश्री भंवरदानजी, पाबूदानजी, महेशदान जी, अम्बादानजी ने जन्म लिया।
इन्द्र बाई का वर्ण गेहुँगा था। इनका स्वरूप ईश्वरमय था। इनकी मुख मुद्रा से सूर्य के समान आभा झलकती थी। आप परम सुंदर थीं। नारी की आसीम सुंदरता कामुक पुरुषों को उनके कर्त्तव्य पथ से विचलित कर देती है। इसी सौंदर्य के कारण ही आवड़ माता को अनेक कष्ट उठाने पड़े।
अतः श्री करणी माता ने अपना भौतिक देह कुरूप रखा ताकि वासनायुक्त पुरुष उनके अलौकिक कार्य में अनावश्यक विघ्न बन कर उपस्थित न हों।
4. दिव्य स्वरूप और मर्दाना वेश
यही कारण था कि इन्द्रबाईसा सदैव मर्दाने वेश में ही विचरण करती थीं। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया। इनकी पोशाक रेशम का सफेद कोट, कमीज तथा श्वेत धोती थी, सिर पर साफा, पैरों में हरितवर्ण पादरक्षिका एवं दाहिने हाथ में छड़ी धारण करती थीं।
माथे पर माँ साफा साजे।<
स्वर्ण जटित छुरगो साजे ॥<
कानों में जग मोती बाला।<
गल सोने रतना री माला॥<
स्वर्ण गले करणी री मूरत।<
है मर्दानी माँ री सूरत ॥<
बन्द गले रो कोट सुहावै ।<
रूप देखकर मन हरसावै ॥<
सूरज सी लिलाड़ी दमके।<
छड़ी हाथ में थारे चमके ॥
5. बाल्यकाल और करणी जी का स्थान
इन्द्रबाई 5-6 वर्ष की अवस्था से ही कभी गुप्त और कभी प्रकट में परचे दिखाती रहीं और अपने घर के अग्र भाग में खेजड़ी के वृक्ष के नीचे श्री करणी जी का स्थान स्थापित कर पूजन करना प्रारंभ कर दिया था।
इनको बुआ श्रीमती लादू बाई का इन पर विशेष स्नेह था और वह ज्यादातर इन्हीं के पास ही रहा करती थी तथा इनकी पूरी तरह से देख-भाल रखा करती थी।
📚 विशेष: करणी माता ने भी बाल्यावस्था से ही अलौकिक चमत्कार प्रदर्शित किए थे। करणी माता का जन्म संवत् 1453 में सुवाप (जोधपुर) में हुआ था और उन्होंने राजस्थान के कई राज्यों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
6. प्रमुख चमत्कार और कथाएँ
श्री इन्द्रकुंवर बाईसा ने अपने जीवनकाल में अनेक अलौकिक चमत्कार किए जिनकी चर्चा आज भी राजस्थान के कोने-कोने में सुनी जाती है। निम्नलिखित कुछ प्रमुख चमत्कार हैं:
🕉️ 6.1 ठाकुर गुमानसिंह का वध — करणी जी जैसा चमत्कार
इन्द्रकुंवर बाई के चमत्कारों का समाचार गेढा नामक ग्राम के ठाकुर गुमानसिंह के पास पहुँचा तो कहने लगे, "यह कहाँ की शक्ति है, मैं नहीं मानता। अगर है तो मुझे कोई चमत्कार दिखावे वरना पाखंड है।"
संयोगवश एक दिन इन्द्रकुंवर बाई गेढे के गढ़ में पहुँच गई। वहाँ पर ठाकुर ने उनका तिरस्कार किया, व्यर्थ की बातें की एवं व्यंग्य कसने लगे। इस पर इन्द्रकुंवर बाई ने ठाकुर से कहा कि आज से नौवें दिन नौ लाख शक्तियाँ तेरा भक्षण कर जावेगी। ठाकुर ने हँसकर कहा तेरे जैसी छोकरियाँ बहुत देखी हैं।
ऐसा कहा जाता है कि ठीक नवें दिन ठाकुर गुमानसिंह अपने गढ़ की ऊपरी छत पर टहल रहे थे, वहीं मृत्यु को प्राप्त हो गए। गढ़ के ऊपर चीलों को मंडराते देखकर लोग ऊपर गए तो वहाँ मृत अवस्था में पड़ा पाया। जो अभूतपूर्व चमत्कार पंद्रहवीं शताब्दी में करणीजी ने जाँगलू के राव कान्हा को दिखाया था, वही चमत्कार 400 वर्ष पश्चात् 19 वीं शताब्दी में श्री इंद्रकुंवर बाई ने गेढ़े के ठाकुर गुमानसिंह को दिखाया।
🕉️ 6.2 आसोप के फतेहसिंह जी को पुत्र प्रदान
फतेहसिंह श्रीमान आसोप स्वामी
जकौं धोक देता लख्या लोक जामी
दियो पुत्र जाको बड़ो भाग धारी।।
🕉️ 6.3 सैण के नेत्रहीन पुत्र को नेत्र ज्योति प्रदान
सैण को सुत हो नैण हीन।<
कर किरपा माँ खोल दिल के नैन॥
🕉️ 6.4 नीमराना की राजकुमारी पांगली का ठीक होना
नीमराना के भूतपूर्व चौहान रियासत के राजा की राजकुमारी पांगली थी (को दौरे आते थे)। राजकुमारी को इंद्रकुंवर बाईसा की सेवा में खुड़द लाया गया। कहते हैं कि घूमर रमने लगी और वे भली-चंगी होकर घर गई।
नीमराणै बाई पंगुली थाई, अनोपकुंवर नाम घरन्दा है ।<
पग तुरन्त पगसानी इंद्र भवानी, चिटिंया हाथ घरन्दा है ।
🕉️ 6.5 सिंथल (बीकानेर) के कवि सुखदान का स्वास्थ्य लाभ
सिंथल (बीकानेर) के कवि सुखदान अदीठ रोग से पीड़ित थे। वह दर्शन करने श्रद्धापूर्वक खुड़द पधारे। देवी की कृपा से उन्हें तत्काल स्वास्थ्य लाभ हुआ।
सींथल सुखदाने कवि बखाने,
पीठ अदीठ दुखन्दा है।<
अराधे इन्द्र, आया, दर्शन पाया,
संकट दूर करन्दा है।
🕉️ 6.6 हीराबाई राठी का लकवा ठीक होना
बीकानेर जिले के नापासर गाँव के माहेश्वरी श्री काशीराम जी राठी की पुत्री श्रीमती हीराबाई लकवे की बीमारी से पीड़ित हो गई थीं। चलने-फिरने से लाचार थीं। इन्द्रबाई ने स्वप्न में दर्शन देकर उन्हें खुड़द बुलवाया और देवी के आशीर्वाद से पूर्ण स्वस्थ होकर लौटीं। आज भी श्रीमती हीराबाई देवी के प्रताप से स्वयं चमत्कारिक परचे देती हैं।
🕉️ 6.7 भक्तमल जी मूंधड़ा और ऊँट गाड़ी का चमत्कार
नापासर के श्री भक्तमल जी मूंधड़ा इंद्रबाईसा के अनन्य भक्त थे। एक बार वह रात्रि की गाड़ी से बेसरोली रेलवे स्टेशन पर प्रातः लगभग चार बजे पहुँचे। उन्होंने मन में निश्चय किया कि स्टेशन से खुड़द तक सामान ले जाने की मुटिया-मजदूरी केवल चार आने से अधिक नहीं दूंगा।
काफी देर तक इंतजार किया किंतु इतने कम पैसों में कोई भी ले चलने के लिए तैयार नहीं हुआ। थोड़े समय बाद अचानक एक ऊँट गाड़ी उनके पीछे से गुजरी। गाड़ीवान ने सामान गाड़ी में रखा और मजदूरी सिर्फ चार आने तय हुई। मंदिर के सामने उतारा गया और जब सेठ अपनी जेब से पैसे निकालकर गाड़ीवान को देने लगे तो वहाँ पर न तो गाड़ीवान ही था और न ऊँट गाड़ी।
सेठ ने ज्यों ही मंदिर में प्रवेश किया तो पुजारियों ने कहा — "लो, ये आ गए!" पूछने पर पुजारियों ने बताया कि देवी ने अभी-अभी कहा था कि मेरा भक्त आज चार आने ही मजदूरी देने का प्रण किए हुए है। अतः उसके प्रण को निभाने के लिए मुझे बेसरोली ऊँट गाड़ी लेकर जाना होगा। यह वृत्तांत सुनकर सेठ ने प्रायश्चित किया कि मुझे ऐसी प्रतिज्ञा नहीं करनी चाहिए जिससे देवी को कष्ट उठाना पड़े।
🕉️ 6.8 ठुकराणी प्रेमकुमारी शेखावत का निरोग होना
रोयां के ठाकुर श्री गणपतसिंह जी की धर्म पत्नी श्रीमती ठुकराणी प्रेमकुमारी शेखावत जो 'इन्द्र-यशोदय' नामक सौमान पुस्तक की रचयिता हैं, शारीरिक एवं मानसिक व्याधियों से पीड़ित थीं। डॉक्टरों एवं वैद्यों से इलाज कराया गया, किंतु कोई लाभ नहीं हुआ।
एक रात सोते-सोते विचार आया कि श्रीमती इन्द्रकुंवर बाईसा का नाम एवं यश खूब फैल रहा है। मैं क्यों नहीं उनको ओट लूं — शरण लूं। प्रातःकाल उठी, स्नानादि से निवृत्त होकर 'जोत' की प्रार्थना की और संकल्प लिया। उन्हें महान आश्चर्य हुआ कि उसी दिन से उनकी व्याधि में कमी होने लगी और 15-20 दिनों में ही पूर्णतः निरोग हो गईं।
उसके बाद वह खुड़द गई, बाईजी महाराज के दर्शन किए। इसके बाद दिन प्रतिदिन उनकी श्रद्धा बाई जी महाराज के प्रति बढ़ती गई। उनके पतिदेव श्रीमान ठाकुर साहब रीयां ने रीयां के गाँव में एक भव्य मंदिर बनवाकर बाई जी महाराज की संगमरमर की मूर्ति प्रतिष्ठापित करवाई।
7. महाराजा गंगासिंह और बीकानेर यात्रा
श्री इन्द्रबाई महाराज के चमत्कारिक कार्यों की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई और श्रद्धालु भक्त चारों तरफ से इनके दर्शन करने खुड़द आने लगे।
भूतपूर्व बीकानेर रियासत के महाराजा श्री गंगासिंह जी करणी जी के परम भक्त थे, स्वयं खुड़द पधारे और श्री इन्द्रबाई साहब के दर्शन करके अपने को धन्य माना। महाराजा साहब के निवेदन करने पर श्री इन्द्रकुंवर बाई संवत् 1991 की फाल्गुन कृष्ण दशमी, शुक्रवार को बीकानेर पधारे।
उन्नीसो इकरानन फागुन बदी दस शुक्रवारो।<
करुणा धनि सुन कान नृपति की आप श्री बीकांन पधारो।
महाराजा गंगासिंह ने इनकी स्मृति में खुड़द में भव्य भवन का निर्माण करवाया था। महाराजा ने मंदिर के उद्घाटन समारोह के लिए 7000 रुपये भी स्वीकृत किए थे जिनमें से 5000 रुपये भोजन में, 2000 रुपये इन्द्र बाईजी को भेंट में दिए गए।
8. छोटी बाई भणभेंरू और 'इन्द्ररतन प्रेमसागर'
'श्री इन्द्रतन प्रेमसागर' की रचयिता एवं प्रधानाध्यापिका कन्या पाठशाला, देशनोक श्रीमती छोटी बाई भणभेंरू का स्वास्थ्य अत्यन्त शोचनीय अवस्था में था, दूध तक हजम नहीं हो पाता था।
जब उन्होंने यह सुना कि जगदम्बा जी करणी जी का खुड़द नामक ग्राम में आविर्भाव हुआ है और सदेह देशनोक में पधारी हुई हैं तो छोटी बाई के अंतकरण में भी उनके दर्शन करने की इच्छा जाग्रत हुई। परंतु स्वास्थ्य साथ न दे रहा था। अंत में चपरासिन की सहायता से आपने पुण्य दर्शन किए और साथ ही कुछ स्तुतिगान भी किया।
फिर क्या था? दर्शन मात्र से ही आपको पूर्ण आरोग्य लाभ हो गया। पट्टियाँ खुल गईं। दूध की माँग प्रबल वेग से बढ़ने लगी और एक सप्ताह भर में आपका मानो काया कल्प हो गया। इस प्रकार नवजीवन पाकर आप धन्य ही नहीं हो गईं प्रत्युत आपके हृदय में भक्ति काव्य धारा के रूप प्रवाहित हो गई और वह 'श्री इन्द्ररतन प्रेमसागर' नामक ग्रंथ में परिणति हुई।
9. महाप्रयाण — संवत् 2012 में देह त्याग
इस प्रकार से अनेक अलौकिक चमत्कारपूर्ण कार्य हुए। श्री इन्द्रकुंवर बाईं महाराज ने संवत् 2012 के मिगसर माह की कृष्ण पक्ष की द्वितीया, गुरुवार को 48 वर्ष की आयु में सांसारिक देह को त्याग कर ज्योति में ज्योति मिला दी।
संमत बीस बारह सही, अगहन पंख अधार।<
सक्ति बीज गुरु पौं समय, मिलगी जोत मझार।
'सिद्ध गयां हि पूज जे-सद्धि रक्षा री ठौड़' की तरह खुड़द आज राजस्थान के लोगों के लिए पूज्य स्थल है, तीर्थ स्थान है। खुड़द के नाम में आज भी जादू है, चमत्कार है। राजस्थान के नर-नारी आज भी उसी श्रद्धा और भक्ति-भाव से खुड़द के उस स्थान की पूजा करते हैं, जहाँ श्री इन्द्रकुंवर बाईसा ने तपस्या की थी, आराधना की थी और श्री करणी का मठ स्थापित किया था।
10. खुड़द मंदिर और वर्तमान महत्व
खुड़द आज राजस्थान के लोगों के लिए पूज्य स्थल और तीर्थ स्थान है। यहाँ पर श्री इन्द्रकुंवर बाईसा ने तपस्या की थी, आराधना की थी और श्री करणी का मठ स्थापित किया था। भूतपूर्व बीकानेर रियासत के महाराजा श्री गंगासिंह जी ने उनकी स्मृति में खुड़द में भव्य भवन का निर्माण करवाया था।
🚩 कैसे पहुँचें: खुड़द ग्राम फुलेरा से मेड़ता रोड जाने वाली रेलवे लाईन पर स्थित बेसरोली स्टेशन से लगभग दो मील (3.2 किमी) पश्चिमोत्तर में स्थित है। नागौर जिले में यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
राजस्थान के नर-नारी आज भी उसी श्रद्धा और भक्ति-भाव से खुड़द के उस स्थान की पूजा करते हैं। इन्द्रबाईसा की पूजा चारण, माहेश्वरी, राजपूत और अनेक समाजों द्वारा की जाती है।
🙏 जानें: राजस्थान की अन्य कुलदेवियों के बारे में पढ़ें — श्री गीगाई माता का इतिहास और परमार वंश की कुलदेवी श्री सच्चियाय माता।
11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — इन्द्रबाईसा (FAQs)
❓ इन्द्रबाईसा कौन हैं और इनका जन्म कहाँ हुआ?
इन्द्रबाईसा (इन्द्र कुंवर बाई) आवड़ माता और करणी माता के रूप में अवतरित आदि शक्ति हैं। इनका जन्म संवत् 1964 में नागौर जिले के खुड़द गाँव में हुआ था। ये रतनू शाखा के चारण श्री सागरदान जी और धापूबाई जागावत की कन्या थीं।
❓ इन्द्रबाईसा का जन्म कब हुआ था?
इन्द्रबाईसा का जन्म विक्रम संवत् 1964 की आषाढ़ शुक्ला नवमी शुक्रवार को हुआ था। ये श्री शिवदाचजी रतनू के पुत्र श्री सागरदान जी और श्रीमती धापूबाई जागावत की कन्या थीं।
❓ खुड़द मंदिर कहाँ स्थित है और इसका महत्व क्या है?
खुड़द मंदिर नागौर जिले में बेसरोली रेलवे स्टेशन से लगभग दो मील पश्चिमोत्तर में स्थित है। यह इन्द्रबाईसा की तपस्या और आराधना का स्थान है। महाराजा गंगासिंह ने यहाँ भव्य भवन का निर्माण करवाया था।
❓ इन्द्रबाईसा ने कौन-कौन से प्रसिद्ध चमत्कार किए?
इन्द्रबाईसा ने अनेक चमत्कार किए जिनमें प्रमुख हैं: ठाकुर गुमानसिंह को शाप देना, आसोप के फतेहसिंह को पुत्र प्रदान करना, सैण के नेत्रहीन पुत्र को नेत्र ज्योति देना, नीमराना की पांगली राजकुमारी को ठीक करना, हीराबाई राठी का लकवा ठीक करना, और भक्तमल जी मूंधड़ा के लिए ऊँट गाड़ी भेजना।
❓ इन्द्रबाईसा का महाप्रयाण कब हुआ?
इन्द्रबाईसा ने संवत् 2012 के मिगसर माह की कृष्ण पक्ष की द्वितीया, गुरुवार को 48 वर्ष की आयु में सांसारिक देह त्याग की।
❓ इन्द्रबाईसा और करणी माता में क्या संबंध है?
इन्द्रबाईसा को करणी माता और आवड़ माता दोनों का ही अवतार माना जाता है। इन्होंने वर्तमान युग में चारण समाज की रक्षा और कल्याण के लिए अवतार लिया। खुड़द में इन्होंने श्री करणी जी का स्थान स्थापित किया था।
❓ इन्द्रबाईसा का मर्दाना वेश क्यों था?
इन्द्रबाईसा परम सुंदर थीं। नारी की आसीम सुंदरता कामुक पुरुषों को उनके कर्त्तव्य पथ से विचलित कर देती है। इसी कारण श्री करणी माता ने अपना भौतिक देह कुरूप रखा और इन्द्रबाईसा ने मर्दाना वेश धारण कर आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया।
❓ खुड़द मंदिर कैसे पहुँचें? (रेलवे और सड़क मार्ग)
खुड़द ग्राम फुलेरा से मेड़ता रोड जाने वाली रेलवे लाइन पर स्थित बेसरोली स्टेशन से लगभग दो मील (3.2 किमी) पश्चिमोत्तर में स्थित है। नागौर जिले में यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो पक्की सड़क से जुड़ा हुआ है।
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8 टिप्पणियाँ
जय माँ करणी इन्द्र
जवाब देंहटाएंJay Indra baisa
जवाब देंहटाएंMandir ka address pakka bhejiye please kyonki hame waha Rajasthan mandir Mai ana hai isliye hum apshe gujarish karte hai hamare is likhe hue massage per thoda Dhyan dekar Hume help karna thank you
SHREE INDER BAISA KHURAD
हटाएंhttps://maps.app.goo.gl/RUxzwuqWQo6m516m8
It's near then besroli you can visit on there if you type on Google maps for inder baisaa temple you can find the real location
हटाएंमंदिर में जाने के लिए आपको जयपुर रेलवे स्टेशन से शाम 4:30 मिनट पर प्लेटफार्म नंबर 7 पर लिलन सुपरफास्ट ट्रेन मिलेगी जिसमें आपको गच्छीपुरा उतरना रहेगा वहा से आप जिप या ऑटो करके सीधे श्री करणी इन्द्र बाईसा धाम पहुंच जायेंगे सर
हटाएंjaipur ya jodhpur ya ajmer se aap gachhipura ya besroli aaye vha se aapko 15 se 20 min me phuch jayenge yha se gadiya mil jayegi
हटाएं8742819330
Nagaur jile m makrana ke besaroli m h ye
जवाब देंहटाएंJai maa karni
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