खूबड़ देवी इतिहास कथा मंदिर Khubad Devi

खूबड़ देवी Khubad Devi 

Khubad Devi Mandir

वांकल देवी की ही एक अन्य बहिन खूबड़ देवी या खूबड़ी भी शक्ति का अवतार मानी जाती है।
इनका समय 8 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में माना जाता है।

इनके पिताजी का नाम चारण माधा जी था। इनका नाम शायद इनके शरीर में कुबड़ होने के कारण माना गया है।
एक साल अकाल पड़ने के कारण लोग अपने माल मवेशी लेकर दूसरे देश जाने लगे तो एक पथिक ने देवल के सहारे रात्रि विश्राम किया और काल के कारण अपने बच्चों को वहीं सोता हुआ छोड़ गया।
दयालु वांकल मा ने उन बच्चों का लालन पालन किया।

 पोकरण (जैसलमेर) के पास माड़वा नामक गाँव में खूबड़ी तलाई इन्हीं के नाम पर मौजूद है, वहाँ पर इनका थान भी है।
 माड़वा में सगत (शक्ति का अवतार) मानते हैं।

 बाड़मेर जिले की सिवाणा तहसील के सरवड़ी चारणान् नामक गाँव में भी खूबड़ देवी का मन्दिर है ।
सरवड़ी के बोगसा चारणो की आप आराध्य देवी है।
चारणों में आज भी खूबड़दान नाम रखने की परम्परा है।

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मेरा उद्देश्य युवा पीढ़ी को हमारे आदर्शों और देवियों के बारे में जानकारी देना है।

Khubad Mata  Mandir Sarwari
खूबड़ देवी Khubad Devi
खूबड़ माता Khubad Mata

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