श्री करणी चालीसा भावार्थ सहित | Karni Chalisa Lyrics with Meaning in Hindi

श्री देशनोक धाम की अधिष्ठात्री देवी माँ करणी की महिमा अपरंपार है। भक्तों की आस्था का केंद्र श्री करणी चालीसा (Karni Chalisa Lyrics) का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। यहाँ माँ करणी चालीसा का संपूर्ण पाठ अर्थ सहित दिया गया है।

क्या आप जानते हैं कि करणी माता चालीसा का नियमित पाठ करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि जीवन के कठिन से कठिन संकट भी दूर हो सकते हैं? आज भी लाखों श्रद्धालु इस चालीसा का पाठ करके अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का अनुभव करते हैं।

श्री करणी चालीसा भावार्थ सहित | Karni Chalisa Lyrics with Meaning in Hindi

- दोहा -

जय गणेश जय गज बदन, करण सुमंगल मूल।
करहू कृपा निज दास पर, रहहू सदा अनूकूल॥
जय जननी जगदीश्वरी, कह कर बारम्बार।
जगदम्बा करणी सुयश, वरणउ मति अनुसार ॥

विस्तृत अर्थ: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में प्रथम पूज्य श्री गणेश की स्तुति की जाती है। हे हाथी के मुख वाले (गज बदन) श्री गणेश! आप सभी मंगल कार्यों के मूल आधार (जड़) हैं। मुझ सेवक पर अपनी कृपा करें ताकि यह चालीसा बिना किसी विघ्न के पूरी हो सके और आपकी कृपा दृष्टि मुझ पर हमेशा बनी रहे। हे संपूर्ण जगत का पालन करने वाली माता जगदीश्वरी! आपकी बारंबार जय हो। इसी जयकारे के साथ, मैं अपनी बुद्धि और क्षमता के अनुसार माँ जगदम्बा के अवतार करणी माता के महान यश, चमत्कारों और महिमा का वर्णन कर रहा हूँ।

- चौपाई -

1. सुमिरौ जय जगदम्ब भवानी, महिमा अकथ न जाय बखानी।

भावार्थ: हे आदि शक्ति जगदम्बा भवानी! मैं आपको हृदय से स्मरण करता हूँ। आपकी महिमा और आपके प्रताप की कथाएं इतनी अनंत हैं कि उन्हें साधारण शब्दों में बयां (बखान) नहीं किया जा सकता।

2. नमो नमो मेहाई करणी, नमो नमो अम्बे दुःख हरणी।

भावार्थ: हे मेहा जी चारण की पुत्री होने के कारण 'मेहाई' कहलाने वाली करणी माता! आपको मेरा बारंबार नमन है। हे संसार के सभी दुखों को हरने वाली माँ अम्बे, आपको मेरा प्रणाम है।

3. आदि शक्ति जगदम्बे माता, दुःख को हरणि सुखों कि दाता।

भावार्थ: हे माँ! आप ही वह मूल आदि शक्ति हैं जिससे इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है। आप अपने भक्तों के जीवन से हर प्रकार के शारीरिक, मानसिक और भौतिक दुखों को नष्ट करके उन्हें सभी सुख प्रदान करने वाली दात्री हैं।

4. निरंकार है ज्योति तुम्हारी, तिंहु लोक फैली उजियारी।

भावार्थ: हे माता! आपका वास्तविक स्वरूप निराकार है (जिसका कोई एक भौतिक आकार नहीं है), आप एक परम दिव्य ज्योति हैं। इस ईश्वरीय ज्योति का प्रकाश स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल—तीनों लोकों में अज्ञान रूपी अंधकार को मिटा रहा है।

5. जो जेहि रूप से ध्यान लगावे, मन वांछित सोई फल पावे।

भावार्थ: माँ का हृदय अत्यंत करुणा से भरा है। जो भक्त जिस भाव (जैसे पुत्र, मित्र, सेवक या याचक) और जिस रूप में आपका ध्यान करता है, माँ उसे उसी के अनुरूप मनचाहा वरदान और फल दे देती हैं।

6. धौलागढ में आप विराजो, सिंह सवारी सन्मुख साजो।

भावार्थ: आप राजस्थान के पवित्र तीर्थ देशनोक में 'धौलागढ़' (करणी माता का सफेद संगमरमर से बना मंदिर) में शक्ति रूप में साक्षात विराजमान हैं। आपकी शक्ति और तेज के प्रतीक स्वरूप, आपकी सवारी जंगल का राजा सिंह (शेर) हमेशा आपके सम्मुख सज्ज और तैयार खड़ा रहता है।

7. भैरों वीर रहे अगवानी, मारे असुर सकल अभिमानी।

भावार्थ: भगवान शिव के अवतार वीर भैरव जी हमेशा एक रक्षक और सेनापति के रूप में आपके आगे-आगे चलते हैं। आपने मिलकर उन सभी दुष्ट राक्षसों और आतातायियों का संहार किया है जिन्हें अपने बल का बहुत अहंकार था।

8. ग्राम ‘सुआप’ नाम सुखकारी, चारण वंश करणी अवतारी।

भावार्थ: (यह माता के जन्म का ऐतिहासिक संदर्भ है) मारवाड़ के अत्यंत सुखदायी 'सुआप' गाँव में, मेहा जी कीनिया (चारण) के घर में माँ जगदम्बा ने स्वयं 'करणी' (रिद्धू बाई) के रूप में अवतार लिया था।

9. मुख मण्डल की सुन्दरताई, जाकी महिमा कही न जाई।

भावार्थ: माता के मुख पर एक अलौकिक, ईश्वरीय तेज और सुंदरता विराजमान है। उस दिव्य आभा और शांति का वर्णन करना किसी भी मनुष्य के लिए संभव नहीं है।

10. जब भक्तों ने सुमिरण कीन्हा, ताही समय अभय करी दीन्हा।

भावार्थ: इतिहास गवाह है कि जब भी किसी सच्चे भक्त ने संकट की घड़ी में सच्चे मन से आपको पुकारा, आपने बिना एक पल की भी देरी किए उसे अभय दान दिया (अर्थात उसे डर और संकट से मुक्त कर दिया)।

11. साहूकार की करी सहाई, डूबत जल में नाव बचाई।

भावार्थ: (यह माता के एक प्रसिद्ध चमत्कार का वर्णन है) जब सिंध प्रांत में एक व्यापारी (साहूकार) का जहाज समुद्र के तूफान में डूब रहा था और उसने आपको पुकारा, तब आपने घर पर बैठे ही चमत्कारिक रूप से अपने हाथ लंबे कर उस डूबते जहाज को सुरक्षित किनारे लगा दिया था।

12. जब कान्हे ने कुमति बिचारी, केहरी रूप धरयो महतारी।

भावार्थ: (जांगलू के राव कान्हा का प्रसंग) जब जांगलू के शासक राव कान्हा ने अहंकार में आकर बुरी नीयत रखी और आपके भक्तों व गायों को परेशान किया, तब आपने क्रोधित होकर एक भयंकर सिंह (केहरी) का रूप धारण कर लिया।

13. मारयो ताहि एक छन मांई, जाकी कथा जगत में छाई।

भावार्थ: आपने उस अत्याचारी शासक कान्हा को एक ही क्षण में सिंह रूप धरकर मार गिराया। दुष्टों के संहार की यह सत्य कथा आज भी पूरे मारवाड़ और विश्व भर में गाई जाती है।

14. नेडी़ जी शुभ धाम तुम्हारो, दर्शन करी मन होय सुखारो।

भावार्थ: देशनोक के पास स्थित 'नेड़ी जी' (जहाँ माता एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे बिलोना करती थीं) आपका एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध स्थान है। वहाँ के दर्शन मात्र से भक्तों के मन को असीम शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

15. कर सौहे त्रिशूल विशाला, गल राजे पुष्पन की माला।

भावार्थ: हे माँ! दुष्टों के दमन के लिए आपके हाथों में एक अत्यंत विशाल और तेजस्वी त्रिशूल सुशोभित होता है, और आपके गले में भक्तों द्वारा प्रेम से पहनाई गई ताजे फूलों की माला राज करती है।

16. शेखोजी पर किरपा किन्ही, क्षुधा मिटाय अभय कर दिन्ही।

भावार्थ: (पुंगल के राव शेखा का प्रसंग) जब राव शेखा मुल्तान के कारागार (जेल) में बंदी थे और भूख-प्यास से तड़प रहे थे, तब माता ने चील रूप में जाकर उनकी भूख (क्षुधा) मिटाई और उन्हें जेल से मुक्त कराकर अभय दान दिया।

17. निर्बल होई जब सुमिरन किन्हा, कारज सभी सुलभ कर दीन्हा।

भावार्थ: समाज का जो भी निर्बल, असहाय या कमजोर व्यक्ति पूरी तरह से टूटकर आपकी शरण में आया, आपने उसके रास्ते की हर रुकावट को हटाकर उसके सभी असंभव कार्यों को आसान (सुलभ) कर दिया।

18. देशनोक पावन थल भारी, सुंदर मंदिर की छवि न्यारी।

भावार्थ: बीकानेर रियासत के पास स्थित 'देशनोक' माता का परम धाम है। यह धरती बहुत ही पवित्र है और यहाँ सफेद संगमरमर से बने माँ के मंदिर (मढ़) की सुंदरता और दिव्यता पूरे विश्व में सबसे अनोखी (न्यारी) है।

19. मढ में ज्योति जले दिन राती, निखरत ही त्रय ताप नशाती।

भावार्थ: देशनोक के मंदिर (मढ़) के गर्भगृह में दिन-रात अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है। इस पवित्र ज्योति के दर्शन (निखरने) मात्र से ही मनुष्य के जीवन के तीनों ताप—आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक (शारीरिक, मानसिक और सांसारिक कष्ट) नष्ट हो जाते हैं।

20. किन्ही यहां तपस्या आकर, नाम उजागर सब सुख सागर।

भावार्थ: आपने देशनोक के इस निर्जन वन में आकर कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इसी तपस्या के प्रताप से आप 'सुखों के सागर' के रूप में पूरे विश्व में विख्यात हुईं।

21. जय करणी दुःख हरणी मईया, भव सागर से पार करइया।

भावार्थ: हे सभी दुखों को जड़ से खत्म करने वाली करणी मैया! आपकी जय हो। जीवन और मरण के इस जन्म-जन्मांतर के भवसागर से पार लगाकर मोक्ष दिलाने वाली केवल आप ही हैं।

22. बार बार ध्यांऊ जगदम्बा, कीजे दया करो न विलम्बा।

भावार्थ: हे माँ जगदम्बा! मेरा मन बार-बार केवल आपके ही चरणों का ध्यान करता है। मुझ पर दया दृष्टि डालें और अब मेरे कष्टों को दूर करने में तनिक भी विलंब (देर) न करें।

23. धर्मराज नै जब हठ किन्हा, निज सूत को जीवत करि लीन्हा।

भावार्थ: (लक्ष्मण को जीवित करने का ऐतिहासिक प्रसंग) जब आपका दत्तक पुत्र लक्ष्मण कोलायत की झील में डूब गया और यमराज (धर्मराज) ने प्राण लौटाने से मना करते हुए हठ किया, तब आपने अपनी योग माया से यमराज को विवश कर अपने पुत्र को स्वयं जीवित कर लिया था।

24. ताही समय मर्यादा बनाई, तुम यह मम वंशज नहि आई।

भावार्थ: उसी समय आपने यमराज की सत्ता को चुनौती देते हुए यह नई मर्यादा (नियम) स्थापित की कि आज के बाद मेरे वंशज (देपावत चारण) मृत्यु के बाद तुम्हारे लोक (यमलोक) में कभी नहीं जाएंगे, उन पर तुम्हारा अधिकार नहीं होगा।

25. मूषक बन मंदिर में रहि हैं, मूषक ते पुनि मानुष बनी हैं।

भावार्थ: आपने वरदान दिया कि मेरे वंशज मरने के बाद चूहों (काबा) का रूप धारण करके मेरे ही मंदिर प्रांगण में मेरी सेवा में रहेंगे, और जब वे काबा रूप में देह त्यागेंगे, तो वे पुनः मेरे ही वंश में मनुष्य रूप में जन्म लेंगे। (यही कारण है कि देशनोक मंदिर में हजारों काबे बिना किसी को नुकसान पहुंचाए विचरते हैं)।

26. दिपोजी को दर्शन दीन्हा, निज लीला से अवगत किन्हा।

भावार्थ: आपने अपने पति और परम भक्त देपा जी (दिपोजी) को अपने साक्षात ईश्वरीय स्वरूप के दर्शन दिए और उन्हें इस संसार में अपने अवतार लेने के मुख्य उद्देश्य और अपनी अलौकिक लीलाओं से परिचित कराया।

27. बने भक्त पर कृपा किन्ही, दो नैनन की ज्योति दिन्ही।

भावार्थ: (भक्त 'बने' सुथार का प्रसंग) आपने 'बने' नाम के एक दृष्टिहीन (अंधे) भक्त की सच्ची पुकार सुनकर उस पर अपार कृपा की और चमत्कारिक रूप से उसकी आँखों की खोई हुई रौशनी लौटा दी।

28. चरित अमित किन्ह अपारा, जाको जश छायो संसारा।

भावार्थ: हे माता! आपने अपने जीवनकाल में और उसके बाद ऐसे अमित (जिन्हें मिटाया न जा सके) और अनगिनत चमत्कार किए हैं, जिनकी यशोगाथा आज भी पूरे संसार के कोने-कोने में छाई हुई है।

29. भक्त जनन को मात तारती, मगन भक्त जन करत आरती।

भावार्थ: आप अपने हर एक भक्त को इस संसार के झमेलों से तारती (मुक्ति दिलाती) हैं। इसी प्रेम और कृतज्ञता के कारण आपके भक्त पूरी तरह मगन (लीन) होकर आपकी आरती और स्तुति गाते हैं।

30. भीड़ पड़ी भक्तो पर जब ही, भई सहाय भवानी तब ही।

भावार्थ: इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी धर्म पर या आपके भक्तों पर कोई विपत्ति (भीड़) आन पड़ी, हे माँ भवानी! आप उसी क्षण उनकी रक्षा और सहायता करने के लिए प्रकट हो गईं।

31. मातु दया अब हम पर कीजे, सब अपराध क्षमा कर दीजे।

भावार्थ: हे करुणामयी माँ! अब हम सांसारिक जीवों पर भी अपनी दया दृष्टि कीजिए। हमसे ज्ञान या अज्ञानता में जो भी भूल-चूक या अपराध हुए हैं, उन्हें एक माँ की तरह क्षमा कर दीजिए।

32. मोको मातु कष्ट अति घेरो, तुम बिन कोन हरे दुःख मेरो।

भावार्थ: हे माता! मुझे जीवन के अति भयंकर कष्टों और चिंताओं ने चारों ओर से घेर लिया है। इस पूरे ब्रह्मांड में आपके सिवा ऐसा कोई नहीं है जो मेरे इन गहरे दुखों को हर सके।

33. जो नर धरे मात कर ध्याना, ताकर सब विधि हो कल्याणा।

भावार्थ: जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ करणी का ध्यान धरता है, उसका न केवल इस लोक में, बल्कि परलोक में भी हर प्रकार (सब विधि) से कल्याण निश्चित है।

34. निशि वासर पूजहिं नर -नारी, तिनकों सदा करहूं रखवारी।

भावार्थ: जो भी स्त्री और पुरुष दिन और रात (निशि-वासर) आपकी उपासना करते हैं, आप एक कवच बनकर सदा उनकी रखवाली करती हैं और उन्हें हर बुरी नज़र से बचाती हैं।

35. भव सागर में नाव हमारी, पार करहु करणी महतारी।

भावार्थ: इस संसार रूपी भयंकर सागर में हमारी जीवन रूपी नाव हिचकोले खा रही है। हे हमारी माता (महतारी) करणी! अब इस नाव की पतवार आपके ही हाथों में है, इसे आप ही किनारे लगाएँ।

36. कंह लगी वरनंऊ कथा तिहारी, लिखत लेखनी थकत हमारी।

भावार्थ: हे माँ! मैं आपके महान कार्यों और आपकी कथाओं का वर्णन कहाँ तक करूँ? आपकी महिमा इतनी अनंत है कि उसे लिखते-लिखते मेरी कलम भी थक जाती है, पर आपके गुण खत्म नहीं होते।

37. पुत्र जानकर कृपा कीजै, सुख संपति नव निधि कर दीजै।

भावार्थ: हे माता! मुझे अपना ही नादान पुत्र समझकर मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें। मेरे जीवन को सुख, संपत्ति और कुबेर की नौ निधियों (सभी प्रकार की संपन्नता) से भर दीजिए।

38. जो यह पाठ करे हमेशा, ताके तन नहि रहे कलेशा।

भावार्थ: जो भी व्यक्ति इस श्री करणी चालीसा का नियमित (हमेशा) और सच्चे भाव से पाठ करेगा, उसके शरीर में कोई रोग नहीं रहेगा और जीवन के सारे मानसिक क्लेश (दुख/तनाव) दूर हो जाएंगे।

39. संकट में जो सुमिरन करई, उनके ताप मात सब हरई।

भावार्थ: जीवन के किसी भी भयानक संकट या विपरीत परिस्थिति में जो आपका सुमिरन (याद) करता है, माता उसके तीनों प्रकार के ताप (कष्ट) तुरंत हर लेती हैं।

40. गुण गाऊं दोऊ कर जोरे, हरऊ मात सब संकट मोरे।

भावार्थ: इसलिए हे माँ! मैं पूरी श्रद्धा के साथ अपने दोनों हाथ जोड़कर आपके इन अलौकिक गुणों का गान कर रहा हूँ। मेरे जीवन में आने वाले सभी संकटों का नाश करें।

करणी माता चालीसा कब और कैसे पढ़ें?

करणी माता चालीसा का पाठ सुबह और शाम करना सबसे शुभ माना जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि, शुक्रवार और मंगलवार के दिन इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • माता के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं
  • शुद्ध मन से चालीसा का पाठ करें
  • पाठ के बाद माता से अपनी मनोकामना प्रकट करें
  • - अंतिम दोहा -

    आदि शक्ति अम्बा सुमिर, धरी करणी का ध्यान।
    मन मंदिर में बास करूं, दूर करो अज्ञान।

    विस्तृत अर्थ: चालीसा के अंत में भक्त प्रार्थना करता है कि—आदि शक्ति माँ जगदम्बा का स्मरण करते हुए और माँ करणी के उस परम तेजस्वी रूप का ध्यान धरते हुए, मैं विनती करता हूँ कि हे माँ! आप हमेशा मेरे मन रूपी मंदिर में ही निवास करें। आपके इस दिव्य प्रकाश से मेरे भीतर का सारा अज्ञान, मोह और अंधकार हमेशा के लिए दूर हो जाए।

    करणी चालीसा पाठ के लाभ (Benefits of Karni Chalisa)

    श्री करणी चालीसा का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्तों को अनेकों लाभ प्राप्त होते हैं:

    • मानसिक शांति और भय से मुक्ति मिलती है।
    • जीवन के भयंकर संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
    • घर में सुख, संपत्ति और ऐश्वर्य का वास होता है।
    • शारीरिक और मानसिक रोगों (त्रय ताप) से छुटकारा मिलता है।
    • माँ करणी का सुरक्षा कवच हमेशा भक्त के साथ रहता है।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

    Q1. करणी माता का मुख्य मंदिर (मढ़) कहाँ स्थित है?

    उत्तर: करणी माता का विश्व प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के पास देशनोक में स्थित है।

    Q2. देशनोक मंदिर में सफेद चूहों का क्या महत्व है?

    उत्तर: मंदिर में रहने वाले चूहों को 'काबा' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ये माता के वंशज हैं। सफेद काबा के दर्शन को साक्षात् माता के दर्शन और अत्यंत शुभ माना जाता है।

    Q3. करणी चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

    उत्तर: इसका पाठ प्रतिदिन सुबह-शाम शुद्ध अवस्था में माँ की ज्योति के सामने करना चाहिए। विशेष रूप से नवरात्रि और संकट के समय इसका पाठ तुरंत फल देने वाला होता है।

    जय करणी माँ! अगर आपको श्री करणी चालीसा भावार्थ सहित | Karni Chalisa Lyrics with Meaning in Hindi पसंद आया हो, तो कमेंट में 'जय माँ करणी' जरूर लिखें।

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25 टिप्पणियाँ

  1. I would be grateful if I get the pdf download option here.
    Thank you for your work. It really helped.

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  2. Jay maa karni ❤️🙏

    Karni mata ri chalisa download Kiya kare , download PDF ro option dyo sa 🙏

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  3. करणी माता की जय हो।
    जय जगदम्बे भवानी माँ ।
    🌼🌼🙏🙏🌼🌼
    राजेन्द्र कुमार सुथार

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  4. करणी माता की जय हो।
    जय जगदम्बे भवानी माँ ।
    🌼🌼🙏🙏🌼🌼
    राजेन्द्र कुमार सुथार

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