Indra Baisa Chalisa Lyrics In Hindi
इन्द्र बाईसा चालीसा
॥ दोहा॥
नमो नमो गज बदन ने रिद्ध-सिद्ध के भंडार।
नमो सरस्वती शारदा माँ करणी अवतार ।॥
इन्द्र बाईसा आपरो खुड़द धाम बड़ खम्भ।
संकट मेटो सेवगा शरण पड़या भुज लम्ब ।
॥ चौपाई॥
आवड़जी अरु राजा बाई।
और देशाणे करणी माई॥
चौथो अवतार खुड़द में लीनो।
चारण कुल उज्जवल कर दीहो॥
सागर दान पिता बड़ भागी।
धापू बाई की कोख उजागी ॥
बचपन में आंगनिये मांही।
थान थरपियो पूजा तांई ॥
दिन में तीनबार निज हाथां।
करती ज्योत सवाई माता॥
जिन-जिन सेवा कीनी तन सूं।
परचा पाया तिन बचपन सूं॥
इन्द्र बाईसा चालीसा
॥ दोहा॥
नमो नमो गज बदन ने रिद्ध-सिद्ध के भंडार।
नमो सरस्वती शारदा माँ करणी अवतार ।॥
इन्द्र बाईसा आपरो खुड़द धाम बड़ खम्भ।
संकट मेटो सेवगा शरण पड़या भुज लम्ब ।
॥ चौपाई॥
आवड़जी अरु राजा बाई।
और देशाणे करणी माई॥
चौथो अवतार खुड़द में लीनो।
चारण कुल उज्जवल कर दीहो॥
सागर दान पिता बड़ भागी।
धापू बाई की कोख उजागी ॥
बचपन में आंगनिये मांही।
थान थरपियो पूजा तांई ॥
दिन में तीनबार निज हाथां।
करती ज्योत सवाई माता॥
जिन-जिन सेवा कीनी तन सूं।
परचा पाया तिन बचपन सूं॥
गेंढा, गाँव खुड़द के पासा।
गुमानसिंह तहं करतो वासा ॥
चारण जाति पर तेज करतो।
इन्द्र कुमारी पर व्यंग कसतो ॥
इन्द्र कुमारी ना शक्ति मानूं।
गढ़ में आ जावे तब जानूं ॥
एक दिवस गेंढे गढ़ मांही।
इन्द्र कुंवरसा पहुँचा जाई ॥
गुमानसिंह हो बड़ो गुमानी।
बाईसा री कदर न जाणी ॥
बोल्यो मौत बता कद म्हांरी।
शक्ति पिछाणूं म्हे जद थारी॥
नवमे दिन नव लाख जोगणी।
भक्षण करसी आय यक्षिणी ॥
तिरस्कार देवी रो कीन्हो ।
नवमे दिन चील्हाँ चुग लीन्हो॥
निमराणा री राज कुमारी।
पंगु पांगली अति दुःखियारी ॥
इन्द्र बाईसा रे शरणे आई।
दुःख हर लीन्हो पीड़ मिटाई॥
नापासर बीकाणें मांही।
सेठाणी एक हीरां बाई ॥
ज़न्म जात की पंगु बेचारी।
खुड़द बुलाय लई महतारी॥
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Indra baisa Chalisa pdf
इन्द्र बाईसा चालीसा
चंगी चार दिनों में कर दी।
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इन्द्र बाईसा चालीसा
चंगी चार दिनों में कर दी।
सुख सम्पत्ति सूं झोलीभर दी ॥
पंगु पन्ना लाल महाजन।
पंगु पन्ना लाल महाजन।
घणी दवाई की, खरच्यो धन ॥
चौबीस मास खुड़द में खटकर।
की देवी री सेवा डटकर ॥
खुश होया सेवा सूं बाई।
खुश होया सेवा सूं बाई।
महाजन रो सब व्यथा मिटाई॥
दुःख हरणी सुख करणी माई।
भक्त हितां तूं दौड़ी आई ॥
ध्यावे राजा राव औ रंका।
ध्यावे राजा राव औ रंका।
मिटा ध्यावता ही सब शंका॥
बांझ ध्याय पुत्र फल पावे।
रोगी सुमरे रोग नशावे ॥
पगा पांगला ने पग देवे।
पगा पांगला ने पग देवे।
इन्द्र बाईसा ने जब सेवे ॥
तन-मन सूं कोई ध्यान लगावे।
दुःख-दरिद्र सारा मिट जावे ॥
माथे पर माँ साफो साजे।
माथे पर माँ साफो साजे।
स्वर्ण जटित छुरंगों साजे ॥
कानों में जग मोती बाला।
गल सोहे रतना री माला॥
स्वर्ण गले करणी री मूरत।
स्वर्ण गले करणी री मूरत।
है मरदानी माँ री सूरत ॥
बन्द गले रो कोट सुहावे।
रूप देखकर मन हरसावे ॥
सूरज सी लिलाड़ी दमके।
खड़ग हाथ में थारे चमके॥
इन्द्र बाईसा करनल रूपा।
रूप आपरो अकथ अनूपा ॥
माथे पर सोहे मद बिन्दू।
खमा खुड़द री अम्बे इन्दू॥
हाथ राख ज्यों हे भुज लम्बे।
शक्ति इन्द्र कुंवरसा अम्बे ॥
घणी खमा खुड़दाने वाली।
पांगलियाँ पग देने वाली ॥
जो कोई जस इन्द्रा रा गावे ।
निश्चय वह सुख सम्पंत्ति पावे ॥
डर डाकर नेड़ा नहीं आवे।
कोर्ट कचेरी इज्जत पावे ॥
इन्द्र चालीसा जो कोई गावे।
पग उभराणी अम्बे आवे॥
हनुमान ध्वावे जगदम्बा ।
मात करो नहीं और विलम्बा॥
॥ दोहा॥
दो हजार बारह मिति, मिगसर मास प्रमाण।
कृष्ण पक्ष द्वितीय गुरु, प्रातज तजिया प्राण ॥
इन्द्र बाईसा खुड़द में, करण बसी देसाण।
जिन ध्याया तिन पाइया, नत मस्तक हनुमान ॥
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