श्री प्रथम पूज्य गणेश जी को विद्या ओर बुद्धि का देव माना जाता है। प्रत्येक विद्यार्थी को श्री गणेश जी का नियमित पूजन ओर स्मरण अवश्य करना चाहिए, ओर सद बुद्धि ओर विद्या की कामना करनी चाहिए।
नियमित रूप से गणेश जी की पूजा से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और धन-धान्य से घर संपन्न रहता है।
भगवान गणेश का बीज मंत्र 'गं' है. इनसे युक्त मंत्र- 'ॐ गं गणपतये नमः' का जप बहुत फलदायी है. मान्यता है कि इस मंत्र के जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है. षडाक्षर मंत्र का जप करने से आर्थिक प्रगति और समृद्धि की प्राप्ती होती है.
प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम।
भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये।।1।।
प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम।
तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम।।2।।
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ।।3।।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम।।4।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर:।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो।।5।।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ।।6।।
जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।7।।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:।।8।।
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