देश के बावन शक्तिपीठों में प्रमुख श्री हिंगलाज माता (Hinglaj Mata) के इस पावन अष्टक का पाठ करने से भक्तों के सभी भय दूर होते हैं। अक्सर लोग सिर्फ इसके लिरिक्स पढ़ते हैं, लेकिन इसका असली फल तब मिलता है जब हम इसके एक-एक शब्द का हिंदी अनुवाद (Meaning) और उसके पीछे का गहरा भावार्थ (Bhavarth) समझें।
श्री हिंगलाज माता शक्तिपीठ (Quick Facts)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब श्री विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए थे। हिंगलाज शक्तिपीठ बलूचिस्तान (पाकिस्तान) का वह पावन स्थान है जहाँ माता सती का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था।
| विषय (Category) | विवरण (Details) |
|---|---|
| शक्तिपीठ का नाम | श्री हिंगलाज माता शक्तिपीठ |
| स्थान (Location) | बलूचिस्तान (पाकिस्तान) |
| सती का अंग | ब्रह्मरंध्र (सिर का हिस्सा) |
| अष्टक पाठ का फल | भय नाश, मोक्ष, और आत्मज्ञान |
हिंगलाज माता मूल मंत्र और अर्थ
तनु शक्ति मनः शिवे, श्री हिंगुलाय नमः स्वाहा ॥
हिंदी अनुवाद: हे अमृत स्वरूपिणी हिंगलाज माता! आपका शरीर साक्षात शक्ति है और आपका मन साक्षात शिव है। आपको मेरा कोटि-कोटि नमन है।
भावार्थ: भक्त माता को शिव और शक्ति का पूर्ण स्वरूप मानकर अपना सर्वस्व अर्पण करते हुए नमन कर रहा है। शक्ति के बिना शिव शव के समान हैं, और शिव के बिना शक्ति अधूरी है। यह मंत्र उसी अद्वैत स्वरूप का आह्वान है।
हिंगलाज अष्टक: हिंदी अनुवाद और भावार्थ (Hinglaj Ashtak Lyrics with Meaning)
प्रचंड दंड बाहु चंड योग निद्रा भैरवी,
भुजंग केश कुण्डलाय कंठला मनोहरी।
निकंद काम क्रोध दैत्य असुर कल मर्दनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): हे प्रचंड दंड धारण करने वाली, योगनिद्रा और भयानक भैरवी का रूप धरने वाली माता! आपके केशों (बालों) और कानों में नागों के कुंडल सुशोभित हैं और गले में मनमोहक माला है। आप काम, क्रोध रूपी आंतरिक दैत्यों और कलयुग के असुरों को कुचलने वाली हैं, ऐसी पाप-रहित और निर्मल माता हिंगलाज को मेरा बारंबार प्रणाम है।
भावार्थ (Bhavarth): इस श्लोक में माता के उग्र और कल्याणकारी दोनों रूपों का वर्णन है। भक्त विनती कर रहा है कि हे माँ! जिस तरह आपने भयंकर असुरों का संहार किया, उसी तरह मेरे मन के भीतर बैठे 'काम (वासना)' और 'क्रोध (गुस्सा)' जैसे राक्षसों का भी सर्वनाश कर दें, ताकि मेरा हृदय आपकी तरह ही निर्मल और पवित्र हो सके।
रक्त सिंह आसनी, सावधान शंकरी,
कुठार खडग खप्र धार कर दलन महेश्वरी।
निशुम्भ शुम्भ रक्तबीज दैत्य तेज भंजनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): लाल रंग के सिंह (शेर) पर विराजमान, अपने भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क (सावधान) रहने वाली हे शंकरी! आपने अपने हाथों में कुल्हाड़ी (कुठार), तलवार (खड्ग) और खप्पर धारण किया हुआ है, जिससे आप दुष्टों का नाश करती हैं। शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे महा-दैत्यों के तेज और अहंकार को तोड़ने वाली हे महेश्वरी, आपको मेरा प्रणाम है।
भावार्थ (Bhavarth): यह श्लोक माता भवानी के वीर और रक्षक स्वरूप को दर्शाता है। माँ अपने भक्तों पर आने वाले हर संकट को लेकर हमेशा 'सावधान' रहती हैं। जिस प्रकार माता ने रक्तबीज जैसे अजेय असुर का रक्त पीकर उसका अंत किया था, उसी प्रकार वे अपने भक्तों के जीवन से हर नकारात्मक ऊर्जा और संकट को जड़ से खत्म कर देती हैं।
जवाहर रत्न बेल केल सर्व कर्म लोलनी,
व्याल भाल चन्द्रकेतु पुष्प माल मेखली।
चंड मुंड गर्जनी सुनाद विन्ध्यवासिनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): आप अनमोल रत्नों (जवाहर) और आभूषणों से सुसज्जित होकर सृष्टि के सभी कर्मों और लीलाओं में मग्न रहती हैं। आपके मस्तक पर सर्प और चंद्र (चंद्रकेतु) सुशोभित है, गले में पुष्पों की माला और कमर में करधनी (मेखला) है। चंड और मुंड नामक राक्षसों पर भयंकर गर्जना करने वाली आप साक्षात विंध्यवासिनी हैं, हे माता आपको प्रणाम।
भावार्थ (Bhavarth): यहाँ माता के ऐश्वर्यवान (राजसी) रूप और एक महान योद्धा रूप का अद्भुत संगम दिखाया गया है। माता एक तरफ तो रत्नों और पुष्पों से सजी हुई सृष्टि की पालनहार हैं, वहीं दूसरी तरफ धर्म की रक्षा के लिए चंड-मुंड जैसे राक्षसों पर काल बनकर गरजने वाली साक्षात विंध्यवासिनी का उग्र रूप भी हैं।
गजेन्द्र चाल काल धूमकेतु चाल लोचनी,
उदार नेत्र तिमिर नाश सुशोभ शेष शांकरी।
अनादि सिद्ध साध लोक सप्तद्वीप विराजनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): आपकी चाल गजराज (हाथी) के समान राजसी है और आपके नेत्र (आँखें) काल (समय) और धूमकेतु के समान तेज और गतिशील हैं। आपके विशाल और उदार नेत्र अज्ञानता के अंधकार (तिमिर) का पूरी तरह नाश करते हैं। हे शांकरी! आप अनादि काल से सिद्धों और साधुओं द्वारा पूजी जाती हैं और पृथ्वी के सातों द्वीपों पर विराजमान हैं।
भावार्थ (Bhavarth): इस श्लोक में भक्त माता की सर्वव्यापकता (Omnipresence) और उनके ज्ञान के प्रकाश को नमन कर रहा है। माता की कृपा दृष्टि पड़ते ही इंसान के जीवन से हर प्रकार का अज्ञान और भटकाव दूर हो जाता है। इस ब्रह्मांड के सातों महाद्वीपों में ऐसा कोई कोना नहीं है, जहाँ माता की परम सत्ता और ऊर्जा मौजूद न हो।
शैल शिखर राजनी जोग जुगत कारिणी,
चंड मुंड चूर कर सहस्त्र भुजा धारिणी।
कराल केश भूत भेष अनन्त रूप दायिनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): आप हिंगलाज पर्वत के शिखरों पर राज करने वाली हैं और आप ही योग तथा ज्ञान की युक्तियाँ बनाने वाली हैं। चंड-मुंड का चूर-चूर करने के लिए आपने सहस्र (हज़ारों) भुजाएं धारण की थीं। आप दुष्टों के विनाश के लिए बिखरे हुए भयानक बालों (कराल केश) और रौद्र भेष में अनंत रूप धारण कर सकती हैं।
भावार्थ (Bhavarth): यह श्लोक यह स्पष्ट करता है कि धर्म की स्थापना और अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए माता कोई भी रूप धर सकती हैं। एक तरफ वे पहाड़ों पर एकांत में योग करने वाली शांत शक्ति हैं, तो दूसरी तरफ पापियों का विनाश करने के लिए वे हज़ारों हाथों वाली भयानक और रौद्र महाकाली का रूप भी ले सकती हैं।
कलोल लोल लोचनी आनन्द कंद दायिनी,
हृदय कपाट खोलनी सुशेष शब्द भाषिणी।
धर्म; कर्म जन्म जात भक्ति मुक्ति दायिनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): आपके चंचल और कृपालु नेत्र भक्तों को परमानंद (आनंद का मूल) देने वाले हैं। आप अज्ञानता का परदा हटाकर हृदय के कपाट (ज्ञान के द्वार) खोलने वाली और मधुर वचन बोलने वाली हैं। इस जन्म में सही धर्म-कर्म, सच्ची भक्ति और अंत में मोक्ष (मुक्ति) प्रदान करने वाली आप ही हैं। हे निरंजनी माता, आपको प्रणाम।
भावार्थ (Bhavarth): हिंगलाज अष्टक का यह सबसे गहरा और आध्यात्मिक श्लोक है। यहाँ भक्त सांसारिक या भौतिक सुख नहीं मांग रहा है, बल्कि वह कह रहा है कि हे माँ! मेरे बंद हृदय के कपाट खोलकर मुझे आत्मज्ञान दें। जीवन का सही धर्म, निस्वार्थ कर्म और सच्ची भक्ति सिखाकर मुझे जन्म-मरण के चक्र से हमेशा के लिए मुक्त (मोक्ष) कर दें।
अलोक लोक राजनी दिव्य देव वर दायिनी,
त्रिलिक शोक हारिणी सत्य वाक्य बोलनी।
आदि अन्त मध्य मात तेरो रूप सर्जनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): आप दृश्य और अदृश्य (दिखने और न दिखने वाले) सभी लोकों की रानी हैं और देवताओं को भी दिव्य वरदान देने वाली हैं। तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) के दुखों को हरने वाली और परम सत्य का उद्घोष करने वाली आप ही हैं। हे माता! इस ब्रह्मांड की शुरुआत (आदि), बीच (मध्य) और अंत, सब कुछ आपकी ही रचना है।
भावार्थ (Bhavarth): इस श्लोक में माता को साक्षात 'परम-ब्रह्म' के रूप में दर्शाया गया है। त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) भी उसी शक्ति के अंश हैं। इस पूरी सृष्टि की उत्पत्ति, उसका निरंतर पालन और अंत में उसका विनाश—यह सब कुछ सिर्फ और सिर्फ माँ भवानी के ही अधीन है। वे ही ब्रह्मांड का परम सत्य हैं।
कुबेर वरुण इन्द्रादि सिद्ध साध रंचनी,
अगम्य पंथ दर्श मात जन्म कष्ट हारिणी।
दास तुम्हारे शरण मात अमर पद दायिनी,
नमोस्तु मात हिंगलाज निर्मला निरंजनी।।
हिंदी अनुवाद (Meaning): कुबेर, वरुण, इंद्र जैसे बड़े-बड़े देवता और महान सिद्ध साधु भी आपकी आराधना करके प्रसन्नता पाते हैं। जब जीवन में कोई रास्ता न दिखे (अगम्य पंथ), तब आप ही मार्ग दिखाती हैं और जन्म-मरण के कष्टों को हरती हैं। हे माता! यह दास आपकी शरण में है, मुझे अमर पद (मोक्ष) का दान दें।
भावार्थ (Bhavarth): यह अष्टक का अंतिम चरण है, जहाँ भक्त अपना पूर्ण समर्पण करता है। वह अपना सारा अहंकार छोड़कर कहता है कि हे माँ! जब स्वर्ग के राजा इंद्र और धन के देवता कुबेर भी आपके दर के भिखारी हैं, तो मेरी क्या बिसात! जीवन के सबसे कठिन और अंधकारमय रास्तों में आप ही मेरा मार्गदर्शन करें और मुझे अपनी शरण में अमरत्व प्रदान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. श्री हिंगलाज माता का शक्तिपीठ कहाँ स्थित है?
उत्तर: श्री हिंगलाज माता का अत्यंत सिद्ध शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के तट पर हिंगलाज पर्वत की गुफा में स्थित है।
Q2. हिंगलाज शक्तिपीठ में माता सती का कौन सा अंग गिरा था?
उत्तर: शिव पुराण और तंत्र चूड़ामणि के अनुसार, यहाँ माता सती का 'ब्रह्मरंध्र' (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था, जिसके कारण यह बावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च माना जाता है।
Q3. हिंगलाज अष्टक का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: हिंगलाज अष्टक एक शक्तिशाली स्तुति है। इसके नियमित पाठ से मन का भय दूर होता है, आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध) का नाश होता है और साधक को आत्मज्ञान व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मित्रों, हिंगलाज अष्टक (Hinglaj Ashtak) का यह पाठ सिर्फ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि साक्षात शक्ति का आह्वान है। इसके हिंदी अनुवाद और भावार्थ को समझने के बाद जब आप पाठ करेंगे, तो आपको एक अद्भुत मानसिक शांति और ऊर्जा महसूस होगी। इस पावन अष्टक को अपने परिजनों के साथ WhatsApp और Facebook पर जरूर Share करें।
अगर आप भी माता का ध्यान करते हैं या हिंगलाज माता आपकी कुलदेवी हैं, तो अपने कुल के नाम के साथ कमेंट बॉक्स में 'जय हिंगलाज माता' जरूर लिखें!
14 टिप्पणियाँ
Jay ma hinglaj
जवाब देंहटाएंJai Shri Hinglaj Maa
जवाब देंहटाएंJay hinglaj maa
जवाब देंहटाएंJai ma hinglaj mata ki jay
जवाब देंहटाएंJai hinglaj maa
जवाब देंहटाएंBlans goatar kuldevi ma Ji Hinglaj mata
जवाब देंहटाएंसुंदर ....... कुलदेवी माँ को प्रणाम
जवाब देंहटाएंजय माता हिंगलाज
जवाब देंहटाएंHingla chalisa ki PDF
जवाब देंहटाएंJai hinglaj mata
जवाब देंहटाएंJai Hinglaj Mata Ji
जवाब देंहटाएंKya India Punjab main Maa Hinglaj mata Ji ka Mandir hai. Jarur batayen.
Jay hinglaj ma🙏🏻
जवाब देंहटाएंJai maata hinglaaj ❣️ 🚩 🙏
जवाब देंहटाएंJai mai ki
जवाब देंहटाएं