हमारे समाज में श्री कुलदेवी माता का विशेष स्थान है और कोई भी धार्मिक कार्य और हवन कुलदेवी माता की आराधना के बिना संपन्न नहीं होता है। कुलदेवी माता की इस कड़ी में आज हम परमार (पंवार) वंश की कुलदेवी के बारे में जानेंगे।
परमार वंश का स्वर्णिम इतिहास
परमार वंश का इतिहास अत्यंत स्वर्णिम है। परमार वंश अग्निवंशी है। महर्षि वशिष्ठ द्वारा अग्नि कुंड से प्रकट चार क्षत्रिय वंशों में से यह एक महान वंश है। आबू पर्वत पर महर्षि वशिष्ठ और अन्य धर्मगुरुओं द्वारा धर्म की रक्षा के लिए यज्ञ किया गया, उस यज्ञ से चार क्षत्रिय कुलों को वैदिक धर्म की रक्षा के लिए दीक्षित किया गया था। परमार वंश के ऐतिहासिक स्रोतों और शिलालेखों में भी इन्हें अग्निवंशी बताया गया है।
परमार वंश की ऐतिहासिक जानकारी (Quick Facts)
| विषय (Category) | विवरण (Details) |
|---|---|
| वंश और कुल | अग्नि वंश, परमार (पंवार) |
| गोत्र और प्रवर | वशिष्ठ / तीन (वशिष्ठ, अत्रि, साकृति) |
| वेद / उपवेद | यजुर्वेद / धनुर्वेद |
| प्रथम राजधानी | उज्जैन (मालवा) |
| कुलदेवी | श्री सच्चियाय माता |
| ईष्टदेव / महादेव | माण्डवराव (सूर्य) / रणजूर महादेव |
| निशान / ध्वज | केसरी सिंह / पीला रंग |
| गढ और वृक्ष | आबू पर्वत / कदम्ब, पीपल |
| शस्त्र और पाघड़ी | भाला / पचरंगी |
परमार या पंवार वंश की कुलदेवी: श्री सच्चियाय माता
परमार या पंवार वंश की कुलदेवी श्री सच्चियाय माता हैं। माता का भव्य मंदिर जोधपुर से लगभग 60 कि.मी. की दूरी पर ओसियां में स्थित है, इसी लिये इनको ओसियां माता भी कहा जाता है। ओसियां पुरातात्विक महत्व का एक प्राचीन नगर है, जो कला का एक महत्वपूर्ण केन्द्र होने के साथ ही धार्मिक महत्व का क्षेत्र भी रहा है।
यहाँ पर 9वीं और 12वीं शताब्दी के कलात्मक मंदिर (ब्राह्मण एवं जैन) और उत्कृष्ट मूर्तियाँ विराजमान हैं। परमार क्षत्रियों के अलावा यह ओसवालों की भी कुलदेवी हैं।
ओसियां नगरी की स्थापना और माता का चमत्कार
स्थानीय मान्यता के अनुसार इस नगरी का नाम पहले 'मेलपुरपट्टन' था, बाद में यह 'उकेस' के नाम से जाना गया और फिर बाद में यह शब्द अपभ्रंश होकर 'ओसियां' हो गया। एक ढुण्ढिमल साधू के श्राप दिए जाने पर यह गांव उजड़ गया था। बाद में उप्पलदेव परमार राजकुमार के द्वारा यह नगर पुनः बसाया गया था।
भीनमाल में राजा भीमसेन पंवार राज्य करते थे। उनके दो पुत्र हुए, बड़ा उप्पलदे और छोटा सुरसुदरू। राजा भीमसेन ने अपने छोटे पुत्र को उत्तराधिकारी घोषित कर बड़े पुत्र उप्पलदे को देश निकाला दे दिया था। तब राजकुमार उप्पलदे ने इसी उजड़ी हुई जगह (ओसियां) में शरण ली थी। वहाँ पर माता जी का एक स्थान था जहाँ चबूतरे पर माँ के चरण चिह्न स्थित थे। उसने आकर माँ को प्रणाम किया और रात्रि होने पर वहीं सो गया।
तब श्री चामुण्डा देवी जी ने प्रकट होकर पूछा कि तू कौन है? इस पर उप्पलदे ने कहा कि मैं पंवार राजपूत हूँ, यहाँ पर नगर बसाना चाहता हूँ। तब देवी जी ने कहा कि सूर्य उदय होने पर जितनी दूर तक तुम अपना घोड़ा घुमाओगे, शाम तक उस जगह मकान बन जाएंगे। दिन उगने पर उसने अपना घोड़ा 48 कोस तक घुमाया और घर बसने लगे, मगर रात्रि में सभी घर फिर ध्वस्त होने लगे।
माँ ने कहा कि तू पहले मेरा मंदिर बना तब तेरा शहर निर्माण करना। राजकुमार बोला, माँ मेरे पास तो कुछ भी नहीं है, मैं तेरा मंदिर कैसे निर्माण करवाऊँ? माँ ने तभी गड़ा हुआ धन, पानी और सभी सामग्री बताई। मंदिर का निर्माण होने पर उप्पलदे ने देवी से पूछा कि मूर्ति सोना, चांदी या पत्थर की कराऊँ? तब देवी जी ने कहा कि तुम शांत रहना, मैं स्वयं पृथ्वी से प्रकट होऊँगी। जब तीसरे दिन माता धरती से प्रकट हुईं तब आकाश में से जोर से गर्जना हुई मानो भूकम्प आ गया हो।
देवी ने राजकुमार से कहा था कि तुम चिल्लाना मत, मगर राजकुमार डर की वजह से चिल्लाने लगा। तब माता धरती में से आधी निकलीं और आधी जमीन के अंदर ही रह गईं। इस पर माता राजकुमार पर कुपित हुईं, मगर माँ तो माँ होती है, माता ने उसको माफ कर दिया और मंदिर के सामने महल बनाकर रहने को कहा।
भाई से युद्ध और ओसियां का पूर्ण निर्माण
राजकुमार बोला कि माँ मकान तो बन गए अब बस्ती कहाँ से लाऊँ? तब माता ने कहा कि भीनमाल जाकर अपने भाई से बस्ती की मांग कर। तभी उप्पलदे ने अपने भाई से बस्ती देने को कहा तो उसने मना कर दिया। दोनों भाइयों में युद्ध होने लगा मगर माँ की कृपा से उप्पलदे का बाल भी बांका नहीं हुआ। उप्पलदे ने अपने भाई को पकड़ लिया, और उसी समय उसने भीनमाल का आधा पट्टा अपने कब्जे में कर लिया। इस प्रकार ओसियां नगर की स्थापना हुई।
मंदिर का वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व
ओसियां की पहाड़ी पर अवस्थित सच्चियाय माता का मंदिर 12वीं शताब्दी के आसपास बना। यह भव्य और विशाल मंदिर महिषमर्दिनी (दुर्गा) को समर्पित है। उपलब्ध साक्ष्यों से पता चलता है कि उस युग में जैन धर्मावलम्बी भी देवी चण्डिका अथवा महिषमर्दिनी की पूजा-अर्चना करने लगे थे। उन्होंने उसे प्रतिरक्षक देवी के रूप में स्वीकार किया था, परंतु देवी के उग्र रूप के बजाय उसके ललित एवं शांत स्वरूप की पूजा अर्चना की।
अतः उन्होंने माँ चामुण्डा देवी के बजाय सच्चियाय माता (सच्चिका माता) नाम दिया। सच्चियाय माता श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय के ओसवाल समाज के साथ परमारों (पंवारों), सांखला, सोढा राजपूतों की ईष्टदेवी या कुलदेवी हैं। मंदिर के गर्भगृह के बाहर 1234 विक्रम संवत (1178 ई.) का शिलालेख आज भी मौजूद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. परमार (पंवार) वंश की कुलदेवी कौन हैं?
उत्तर: परमार या पंवार वंश की कुलदेवी श्री सच्चियाय माता हैं, जिन्हें ओसियां माता के नाम से भी जाना जाता है।
Q2. सच्चियाय माता का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर: माता का ऐतिहासिक और भव्य मंदिर राजस्थान के जोधपुर जिले से लगभग 60 किलोमीटर दूर ओसियां (Osian) कस्बे में स्थित है।
Q3. ओसियां नगरी की स्थापना किसने की थी?
उत्तर: ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, ओसियां नगरी की स्थापना भीनमाल के परमार राजकुमार उप्पलदेव ने माता के आशीर्वाद से की थी।
Q4. सच्चियाय माता और किन समाजों की कुलदेवी हैं?
उत्तर: परमार क्षत्रियों के अलावा, सच्चियाय माता श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय के ओसवाल समाज, सांखला और सोढा राजपूतों की भी कुलदेवी या इष्टदेवी हैं।
मित्रों आज हमने परमार वंश की कुलदेवी (Parmar Vansh Ki Kuldevi) के बारे में जाना। उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इसे Facebook और Whatsapp पर जरूर Share करें। अगर आप भी माता के भक्त हैं तो कमेंट में 'जय मां सच्चियाय' जरूर लिखें।
17 टिप्पणियाँ
Jai sachiyay mata
जवाब देंहटाएंमै भी परमार राजपूत हूं किन्तु हमारा गोत्र कश्यप है ऐ कैसे है हमे नहीं पता कृप्या बताये
जवाब देंहटाएंAchal
हटाएंजय हो मां सच्चियाय माता की
जवाब देंहटाएंJai sachiyayi mata
जवाब देंहटाएंजय श्री सच्चियाय माता
जवाब देंहटाएंJay maa sacchiyay
जवाब देंहटाएंजय सचिया माता आपका अनूमान सत्य हो लेकिन परमारो की कूल दैवी तो अवूगण की अरवूदा माता हे जो की पराशर मूनि दूवार हवन कूंण मै सै उत्पत्ति बताई गई है बंश अगनि गोतृ साखला अव फीर बहा सै कूछ दीन वाद जव उज्जैन बसाया गया राजा विक्रमाजीत द्वारा तब उज्जैनी तरफ के परमारो की कुलदेवी कालका देवी हुई। जय श्री राम
जवाब देंहटाएंRatholiya Parivar ki kuldevi kaun si hai
जवाब देंहटाएंपरमार वंश की कुलदेवी एवं उनकी आराध्य देवी सच्चियाय माता सब पर कृपा करें
जवाब देंहटाएंparmar atyre badhi jgyae se koi chamuda pujese to koi kalka to koi harshd bhavani
जवाब देंहटाएंजय माता दी हे मां सभी का कल्याण करो
जवाब देंहटाएंजय माता दी
इस वेबसाइट के द्वारा आप अपनी कास्ट की कुल देवी देख सकते है ...यह बहुत ही मेहनत से बनाई गयी वेबसाइट है जिसके लिए मैं कोटि कोटि वंदन करता हूँ ...
जवाब देंहटाएंजय सच्चियाय माता
जवाब देंहटाएंJai saccha yai mata
जवाब देंहटाएंJay Sasyaymata
जवाब देंहटाएंJay ma sachiyay
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