शक्ति और भक्ति की अनूठी संगम स्थली श्री हिंगलाज शक्तिपीठ, बावन शक्तिपीठों में अपना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट स्थान रखता है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की दुर्गम पहाड़ियों के बीच हिंगोल नदी के किनारे स्थित यह मंदिर, माता सती के 'ब्रह्मरंध्र' (मस्तक का ऊपरी भाग) के गिरने से महातीर्थ बना। माता हिंगलाज की महिमा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के हिंदू श्रद्धालु और यहाँ तक कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी उन्हें 'बीबी ननी' के रूप में बड़ी श्रद्धा से पूजते हैं। इस लेख में हम माता हिंगलाज की पावन आरती, उसके एक-एक शब्द का गहरा अर्थ और इस दिव्य शक्तिपीठ के इतिहास को विस्तार से समझेंगे।
इस लेख की मुख्य सामग्री (Table of Contents):
हिंगलाज शक्तिपीठ का इतिहास और बलूचिस्तान की महिमा
माता हिंगलाज का यह स्थान किसी गुफा में प्राकृतिक रूप से बनी दिव्य शिला (पिंडी) है। यहाँ माता की कोई मानव निर्मित मूर्ति नहीं है, बल्कि सदियों से प्रज्वलित एक ज्योति और सिंदूरी शिला ही माता का साक्षात् स्वरूप मानी जाती है। राजस्थान और गुजरात के कई समुदायों, विशेषकर खत्री, राजपुरोहित, चारण और क्षत्रिय समाज में माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। यह वेबसाइट माता हिंगलाज के ऐतिहासिक शिलालेखों, प्राचीन कथाओं और सांस्कृतिक महत्व को सहेजने का एक विनम्र प्रयास है।
हिंगलाज माता आरती लिरिक्स: Hinglaj Mata Aarti Lyrics in Hindi with Meaning
ॐ जय हिंगलाज माता, मैया जय हिंगलाज माता...
जो नर तुमको ध्याता, वांछित फल पाता।
भावार्थ: हे माता हिंगलाज, आपकी सदैव जय हो। जो भी भक्त आपके इस पावन स्वरूप का ध्यान धरता है और सच्ची श्रद्धा से आपकी उपासना करता है, वह जीवन में अपने मन की इच्छा के अनुसार शुभ फल प्राप्त करता है।
हीरा पन्ना मंडित, शीश मुकुट सोहे।
भाल सिन्दुरी टीका, भक्तन मन मोहे ।।1।।
भावार्थ: मैया, आपके मस्तक पर हीरा और पन्ना जैसे बहुमूल्य रत्नों से जड़ा हुआ दिव्य मुकुट सुशोभित है। आपके माथे (भाल) पर लगा सिंदूरी तिलक आपकी सुंदरता को बढ़ाता है और हर भक्त के मन को शांति पहुँचाते हुए मोहित कर लेता है।
कर्णफूल अति उज्जवल, झिलमिल सा चमके।
गजमोतिन की माला, कण्डन पर दमके ।।2।।
भावार्थ: आपके कानों में पहने हुए कर्णफूल अत्यंत प्रकाशवान और झिलमिलाते सितारों की तरह चमक रहे हैं। आपके गले में विशाल गज-मोतियों की दिव्य माला आपके कंठ की शोभा बढ़ा रही है।
स्वर्ण मेखला कटि में, रत्नजड़ित लोभे।
रक्तांबर मणि मण्डित, अगन पर शोभे ।।3।।
भावार्थ: आपकी कमर (कटि) में सोने की करधनी सुशोभित है जो रत्नों से जड़ी हुई है। आपने जो लाल रंग के वस्त्र (रक्तांबर) पहने हैं, वे मणियों से जड़े होने के कारण अग्नि की लौ के समान प्रकाश फैला रहे हैं।
हाथ त्रिशूल विराजे, चक्र खड़गधारी।
घनुष बाण औ ज्वाला, धारे महतारी ।।4।।
भावार्थ: माँ हिंगलाज, आपने अपने हाथों में त्रिशूल, सुदर्शन चक्र और खड्ग (तलवार) धारण की है। साथ ही आप धनुष-बाण और पवित्र ज्वाला को धारण करने वाली वह महाशक्ति हैं जो अधर्म का नाश करती हैं।
राजहंस तव वाहन, श्वेतासन राजे।
सिंहासन वृषभासन, माता को साजे ।।5।।
भावार्थ: आपका वाहन राजहंस है और आप श्वेत आसन पर विराजमान होती हैं। इसके साथ ही सिंह और वृषभ (बैल) के आसन भी आपके शक्ति स्वरूप को सुशोभित करते हैं।
खड़े भीमलोचन है, भैरव तव हारे।
शक्ति कोटरी तेरी, शक्ति पीठ तारे ।।6।।
भावार्थ: आपके द्वार की रक्षा के लिए भीमलोचन भैरव सदैव तत्पर रहते हैं। आपकी 'शक्ति कोटरी' दिव्य ऊर्जा का स्रोत है और आपका यह शक्तिपीठ संसार के समस्त जीवों का उद्धार करने वाला है।
क्षेत्र हिंगला ज्याला, मुख सा है तेरा।
ब्रह्मरंध्र से प्रकटी, महातीर्थ तेरा ।।7।।
भावार्थ: हिंगलाज क्षेत्र की दिव्य ज्वाला आपके मुख मंडल की कांति के समान है। यहाँ माता सती का ब्रह्मरंध्र गिरने से यह स्थान पृथ्वी का महातीर्थ बन गया है।
क्षत्रिय कुल की रक्षक, सबकी है माता।
नर-नारी ओर साधु, अभय सदा पाता ।।8।।
भावार्थ: आप विशेष रूप से क्षत्रिय कुल की रक्षक हैं, परंतु आपकी ममता संपूर्ण जगत के लिए है। चाहे नर-नारी हों या साधु-संत, जो भी आपकी शरण में आता है, वह भयमुक्त (अभय) हो जाता है।
कनक पात्र में शोभित, अगर कपूर बाती।
आरती हम सब गावत, और तुम हो वरदात्री।।9।।
भावार्थ: सोने के थाल में अगर और कपूर की सुगंधित ज्योत जल रही है। हम सभी भक्त मिलकर आपकी आरती उतारते हैं और आप हमें मनोवांछित वरदान देने वाली वरदात्री माँ हैं।
माँ हिंगलाज की आरती, हम सब मिल गावें।
तन मन धन सुख सम्पति, इच्छा फल पायें ।।10।।
भावार्थ: हम सब मिलकर माँ हिंगलाज की पावन आरती का गान करते हैं ताकि हमें उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो।
कुलदेवी के रूप में माता हिंगलाज की उपासना
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के अनुसार, माता हिंगलाज की पूजा की जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं। बलूचिस्तान की दुर्गम यात्रा को 'ननी का हज' कहा जाता है, जो इस स्थान की सांस्कृतिक व्यापकता को दर्शाता है। कुलदेवी की आरती का नित्य पाठ करने से न केवल पितृ दोषों की शांति होती है, बल्कि परिवार में एकता और सुख का वास होता है। हमारी वेबसाइट mykuldevi.com का उद्देश्य ऐसी ही प्राचीन परंपराओं को आज की पीढ़ी तक पहुँचाना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. हिंगलाज माता का मंदिर वर्तमान में किस देश में है?
माता हिंगलाज का मुख्य शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लसबेला जिले के हिंगोल नेशनल पार्क में स्थित है।
2. हिंगलाज माता आरती (Hinglaj Mata Aarti) करने का सही समय क्या है?
माता की आरती सुबह सूर्योदय के समय और शाम को संध्या काल में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
3. माता हिंगलाज को 'बीबी ननी' क्यों कहा जाता है?
बलूचिस्तान के स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग माता को अपनी नानी के समान पूज्य मानते हैं, इसलिए वे श्रद्धा से उन्हें 'बीबी ननी' कहते हैं।
4. क्या घर पर माता हिंगलाज की आरती की जा सकती है?
हाँ, आप अपने घर के मंदिर में माता हिंगलाज की फोटो या पिंडी के स्वरूप के सामने घी का दीपक जलाकर यह आरती कर सकते हैं।
जय हिंगलाज माता!
उम्मीद है कि माता हिंगलाज की आरती और उसका यह विस्तृत भावार्थ आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा। यदि आप भी माता के अनन्य भक्त हैं, तो कमेंट बॉक्स में 'जय माता दी' जरूर लिखें और इस लेख को अपने परिजनों के साथ साझा करें।
4 टिप्पणियाँ
👍👍👍
जवाब देंहटाएंमाँ हिंगलाज के कुछ भजन भी इस माला में भेजे आपके इस भक्ति मई माला को सुनके मन प्रसन्न हो गया जय हिंगलाज
जवाब देंहटाएंमाँ हिंगलाज के कुछ भजन भी इस माला में भेजे आपके इस भक्ति मई माला को सुनके मन प्रसन्न हो गया जय हिंगलाज
जवाब देंहटाएंBhot bdiya jay हिंगलाज माता की
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